
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका पर जमकर निशाना साधा है। खामेनेई ने कहा कि उनका देश अमेरिकी इशारों पर अस्थिर करने की कोशिशों का सामना कर रहा है और अमेरिकी नेताओं को भाड़े के टट्टुओं पर दांव लगाना बंद करना चाहिए।
यह बयान ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बीच आया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल इन प्रदर्शनों को भड़का रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विरोध प्रदर्शन कर रहे नागरिकों का समर्थन करते हुए ईरान पर हमले की धमकी भी दी है।
खामेनेई का बयान और देशभक्ति का संदेश
सोमवार शाम को खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा,
“आपकी हिम्मत से भरी इन बड़ी रैलियों ने विदेशी दुश्मनों की उन साजिशों को पूरी तरह नाकाम कर दिया, जिन्हें अंदरूनी किराए के टट्टुओं ने अंजाम देने का मंसूबा बनाया था।”
खामेनेई ने यह भी कहा कि महान ईरानी राष्ट्र ने दुश्मनों के सामने अपना संकल्प और पहचान साबित कर दी है। उनका कहना था कि अमेरिकी नेताओं को धोखे भरे काम बंद कर देने चाहिए और गद्दार भाड़े के टट्टुओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी आरोप लगाया कि हाल की हिंसा में अमेरिका और इजरायल शामिल हैं और उनके पास इस बात के दस्तावेज़ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों को सीधे विदेशी आदेशों पर गोलियों से निशाना बनाया गया।
अस्पतालों में लाशों का डरावना मंजर
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरान में बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं। तेहरान के दक्षिण में स्थित काहरीजाक फोरेंसिक मेडिकल सेंटर में अस्थायी मुर्दाघर में लाशें काले बैग में रखी जा रही हैं।
इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग फोरेंसिक सेंटर और वेयरहाउस जैसे कमरों में जमीन पर पड़ी लाशों में अपने प्रियजनों को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं। एक्टिविस्ट ग्रुप ममलकेत का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में शव आने के कारण उन्हें फर्श और मेज पर लाइन से रखा जा रहा है। कुछ अस्पताल और फोरेंसिक सेंटर अस्थायी मुर्दाघरों में बदल दिए गए हैं।
आगे का परिदृश्य
ईरान में विरोध प्रदर्शन और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों के बीच खामेनेई ने साफ संदेश दिया है कि ईरानी राष्ट्र मजबूत, जागरूक और हमेशा तैयार है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनके ‘भाड़े के टट्टु’ और विदेशी साजिशें अब काम नहीं आएंगी।
देश की बढ़ती हिंसा और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरों में भी लगातार उभरती जा रही है।