
नई दिल्ली: भारत के यूके और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ बढ़ते व्यापारिक रिश्ते अब रंग दिखाने लगे हैं। भारत-यूके और भारत-ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम मंजूरी जल्द मिल सकती है, जिससे भारत का कपड़ा उद्योग नई ऊँचाइयों को छूने को तैयार है। वहीं, यह बांग्लादेश के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार, यूके और यूरोप के बड़े कपड़ा ब्रांड्स जैसे Marks & Spencer, Primark, Next, C&A और Mothercare अब भारतीय सप्लायर्स से सीधी बातचीत शुरू कर चुके हैं। निर्यातक बताते हैं कि ये ब्रांड तमिलनाडु के तिरुपुर जैसे प्रमुख कपड़ा हब में फैक्ट्रियों का निरीक्षण और मूल्यांकन बढ़ा रहे हैं। यह कदम बांग्लादेश में सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं और भारत से कम टैरिफ के तहत आयात की संभावनाओं के चलते उठाया जा रहा है।
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमण्यन का कहना है कि जो ब्रांड पहले से भारत से सामान खरीद रहे हैं, वे अपनी खरीद बढ़ाने के लिए भी उत्सुक हैं। नए ब्रांड्स फैक्ट्रियों का तकनीकी ऑडिट कर रहे हैं और भारत में उत्पादन बढ़ाने की संभावना तलाश रहे हैं।
भारत–यूके एफटीए के तहत भारत के 99% निर्यात पर लगने वाले टैरिफ को समाप्त करने का प्रस्ताव है। यह समझौता यूके की संसद की मंजूरी के बाद लागू होगा, जिसके अगले कुछ महीनों में होने की उम्मीद है।
वर्तमान में आयात शुल्क के कारण भारत से सामान बांग्लादेश की तुलना में महंगा पड़ता है। बांग्लादेश को लगभग 25 वर्षों से यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिली हुई है। जबकि भारत के कपड़े और वस्त्रों पर ईयू में 12.5% और यूके में 9.6% शुल्क लगता है। एफटीए लागू होने के बाद यह अंतर खत्म हो जाएगा, और भारत बांग्लादेश के बराबर हो जाएगा।
कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय अग्रवाल का कहना है कि सीएंडए जैसे खरीदार बांग्लादेश से बड़ी मात्रा में जींस और बॉटम्स खरीदते हैं। अब वे अपनी सोर्सिंग का एक हिस्सा भारत में शिफ्ट करने पर विचार कर रहे हैं।
इस दिशा में कदम बढ़ाने से न केवल भारत के कपड़ा उद्योग को नई गति मिलेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।