
बिहार की राजनीति में ‘यात्राओं के नायक’ के रूप में पहचान बना चुके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता के बीच उतरने जा रहे हैं। 16 जनवरी 2026 से वे अपनी 17वीं राज्यव्यापी ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा न केवल उनके बीस वर्षों के शासनकाल का लेखा-जोखा है, बल्कि आने वाले पांच वर्षों के विकास रोडमैप का भी संकेत मानी जा रही है।
नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्राओं का यह सिलसिला वर्ष 2005 की ‘न्याय यात्रा’ से शुरू हुआ था, जिसने सत्ता परिवर्तन की नींव रखी। अब 2025 के विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई बहुमत के साथ मिली प्रचंड जीत के बाद, ‘समृद्धि यात्रा’ उनके सुशासन को आर्थिक और सामाजिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिश है।
न्याय से समृद्धि तक का दो दशक लंबा सफर
12 जुलाई 2005 को तत्कालीन राबड़ी देवी सरकार के खिलाफ न्याय की आवाज बुलंद करने वाले नीतीश कुमार ने बीते 20 वर्षों में 16 अलग-अलग यात्राओं के माध्यम से बिहार की नब्ज टटोली। इन यात्राओं ने उन्हें जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का मंच दिया।
अब 17वीं यात्रा ‘समृद्धि’ के नाम पर राज्य को विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाने का संकल्प है।
चंपारण: नीतीश कुमार के लिए ‘लकी’ धरती
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में पश्चिम चंपारण की धरती का विशेष महत्व रहा है। उनकी कई ऐतिहासिक यात्राओं की शुरुआत यहीं से हुई है। माना जा रहा है कि इस बार भी ‘समृद्धि यात्रा’ का शुभारंभ भितिहरवा या वाल्मीकिनगर जैसे प्रतीकात्मक स्थानों से किया जा सकता है।
महात्मा गांधी की कर्मभूमि चंपारण से यात्रा शुरू करना नीतीश कुमार के लिए न केवल शुभ संकेत माना जाता है, बल्कि यह उनके राजनीतिक आत्मविश्वास और जनसमर्थन का भी प्रतीक रहा है।
सुशासन का नया अध्याय
‘समृद्धि यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य सात निश्चय, कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को परखना है। मुख्यमंत्री स्वयं जिलों का दौरा कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं।
यह यात्रा अगले पांच वर्षों के लिए सरकार की प्राथमिकताओं को तय करने, जन-आकांक्षाओं को समझने और विकास की नई दिशा निर्धारित करने का सबसे बड़ा मंच साबित होगी।
राजनीतिक संदेश भी साफ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ‘समृद्धि यात्रा’ केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल को दोबारा जनता के सामने रखने और भविष्य की राजनीति की जमीन मजबूत करने की रणनीति भी है।
न्याय से शुरू हुआ सफर अब समृद्धि की ओर बढ़ रहा है—और एक बार फिर चंपारण की धरती इस ऐतिहासिक यात्रा की साक्षी बनने जा रही है।