
सोमनाथ, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के सोमनाथ से पूरी दुनिया को एक मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक कई आक्रांताओं ने सोमनाथ पर हमला किया, लेकिन हर बार यह मंदिर पुनर्निर्मित होकर खड़ा रहा। पीएम मोदी ने इसे हिंदुस्तान की शक्ति, विश्वास और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक बताया।
सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व
- सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है।
- यह मंदिर पूर्वजों के पराक्रम, त्याग और बलिदान का प्रतीक है।
- आक्रांताओं ने मंदिर को कई बार तोड़ा, लेकिन हर युग में यह फिर से स्थापित हुआ।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:
- “एक हजार साल पहले हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था और विश्वास के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। सोमनाथ की ध्वजा आज भी पूरी सृष्टि को यह संदेश देती है कि हिंदुस्तान की शक्ति और सामर्थ्य क्या है।”
- उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर पर हमले केवल आर्थिक लूट के लिए नहीं, बल्कि धर्म और संस्कृति को नष्ट करने के लिए किए गए थे।
वैश्विक संदर्भ
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा:
- अमेरिका के टैरिफ युद्ध, पाकिस्तान में आतंकवाद की फैक्ट्री और बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हमलों पर भारत की पैनी नजर है।
- चीन और तुर्की को भी स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारत अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है।
- भारत ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है, और इसे कोई बदल नहीं सकता।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
- पीएम मोदी ने कहा कि यह पर्व सिर्फ हजार साल पहले हुए विध्वंस की याद में नहीं, बल्कि सोमनाथ की हजार साल की यात्रा और भारत के अस्तित्व और अभिमान के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
- 1951 में मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल और सोमनाथ की स्वाभिमान यात्रा के 1000 साल पूरे हो रहे हैं।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ से भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामरिक ताकत को उजागर करते हुए दुनिया को संदेश दिया कि भारत अपनी आस्था और सुरक्षा के मामले में किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।