Friday, February 6

दिल्ली नगर निगम और GDMA में आर-पार, मांगा टोल कलेक्शन का आधा हिस्सा

नई दिल्ली: राजधानी में टोल प्लाजा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। जहां NHAI कुछ टोल प्लाजा हटाने की मांग कर रहा है, वहीं गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDMA) ने NH-48 पर रजोकरी/सिरहौल टोल प्लाजा से वसूली जाने वाली राशि का आधा हिस्सा अपने लिए देने की मांग की है।

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GDMA की याचिका:
GDMA ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि MCD जितना टोल टैक्स वसूल करती है, उसका 50 प्रतिशत GDMA को मिलना चाहिए, अन्यथा टोल प्लाजा हटाया जाए। GDMA का तर्क है कि एमसीडी का टोल प्लाजा GDMA के कार्य क्षेत्र में स्थित है और इसका लाभ दोनों पक्षों को मिलना चाहिए।

NHAI की मांग:
वहीं NHAI पहले ही एमसीडी के 9 टोल हटाने की मांग कर चुका है। NHAI का कहना है कि एमसीडी टोल का कोई खास उपयोग नहीं करता और इसे केवल राजस्व जुटाने के लिए बनाया गया है, जिससे रोजाना लोगों को परेशानी होती है।

एमसीडी के टोल प्लाजा और ईसीसी वसूली:
दिल्ली नगर निगम के पास कुल 126 टोल प्लाजा हैं, जिनमें से 13 में RFID टैग के माध्यम से गाड़ियों की एंट्री होती है। MCD केवल टोल टैक्स ही नहीं, बल्कि एनवायरनमेंट कंपन्सेशन चार्ज (ECC) भी वसूल करती है।
पिछले साल दिसंबर तक ECC के रूप में 1753 करोड़ रुपये वसूले गए, जिनमें से केवल 781.4 करोड़ रुपये दिल्ली की हवा सुधारने में खर्च किए गए। बाकी 971.8 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नहीं हो पाया।

इस विवाद के बढ़ते ताने-बाने से यह साफ है कि टोल प्लाजा प्रशासन और आसपास के प्रशासनिक निकायों के बीच आर-पार की स्थिति बन गई है।

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