Saturday, January 10

ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना का अहम रक्षा बेस, अंतरिक्ष से हमलों से बचाव की रणनीति

 

This slideshow requires JavaScript.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा जताए जाने के बाद यह द्वीप एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। ट्रंप के बयानों ने ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस की अहमियत को फिर से उजागर किया है। यह बेस अमेरिका की सबसे उत्तरी मिलिट्री चौकी है, जो सैटेलाइट ट्रैकिंग और मिसाइल डिफेंस के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करता है।

 

पिटुफिक बेस का रणनीतिक महत्व

पिटुफिक बेस, जिसे पहले थुले एयर बेस के नाम से जाना जाता था, ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति उत्तरी हवाई और अंतरिक्ष मार्गों पर निगरानी रखने के लिए अत्यधिक उपयुक्त है। यह बेस आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होने वाले नए समुद्री मार्गों की निगरानी भी इस बेस की जिम्मेदारी में शामिल है।

 

पिटुफिक बेस का इतिहास

इस बेस की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध से पहले हुई थी, और इसे 1951 में शीत युद्ध के दौरान एक गुप्त सैन्य स्थल के रूप में स्थापित किया गया था। इसका प्राथमिक उद्देश्य सोवियत संघ की ओर से आने वाली लंबी दूरी की बमवर्षक विमानों पर निगरानी रखना था। यही कारण था कि इसे एक फ्रंटलाइन रणनीतिक संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किया गया।

 

बेस का नामकरण और वर्तमान कार्य

2023 में, थुले एयर बेस का नाम बदलकर पिटुफिक स्पेस बेस कर दिया गया। इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड की सांस्कृतिक पहचान को सम्मानित करना और बेस की आधुनिक अंतरिक्ष संचालन भूमिका को स्पष्ट करना था। वर्तमान में यह बेस 12वें स्पेस वार्निंग स्क्वाड्रन का मुख्यालय है, जो बैलिस्टिक मिसाइल चेतावनी प्रणाली रडार का संचालन करता है। यह बेस सैटेलाइट ट्रैकिंग के लिए भी महत्वपूर्ण है और वैश्विक अंतरिक्ष संचालन के लिए एक केंद्रीय स्थान है।

 

बर्फ में जमी अमेरिकी सेना

यह बेस नौ महीने तक बर्फ से ढका रहता है और तीन महीने तक पूरी तरह अंधेरे में डूबा रहता है, लेकिन फिर भी यह साल भर चालू रहता है। रूसी और चीनी गतिविधियों की बढ़ती भूमिका के चलते पिटुफिक की रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ गई है। यह अमेरिका और NATO के लिए इन देशों की गतिविधियों की निगरानी करने का एक केंद्रीय केंद्र बन गया है।

 

वर्तमान भूराजनीतिक स्थिति

पिटुफिक बेस अमेरिका और डेनमार्क के बीच 1951 के रक्षा समझौते के तहत संचालित होता है, जो अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य बेस स्थापित करने की अनुमति देता है, जबकि ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता बनी रहती है। इसके विस्तार के लिए दोनों देशों से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होता है।

 

अंतरिक्ष से होने वाले हमलों के खिलाफ ग्रीनलैंड का यह बेस “कवच” बनकर काम करता है, और इसी वजह से यह अमेरिका की रक्षा रणनीति का अभिन्न हिस्सा है।

Leave a Reply