
सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने भारत को स्मार्टफोन निर्माण और निर्यात में वैश्विक मानचित्र पर शीर्ष पर ला दिया है। अमेरिका की दिग्गज कंपनी ऐपल ने भारत से दिसंबर 2025 तक कुल $50 अरब के आईफोन का निर्यात किया है। यह आंकड़ा केवल पीएलआई योजना में शामिल होने के बाद का है, जिसकी शुरुआत वित्तीय वर्ष 2021-22 में हुई थी।
सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में ही ऐपल ने लगभग $16 अरब का निर्यात किया, जिससे योजना की अवधि के दौरान कुल निर्यात $50 अरब से भी अधिक हो गया। वहीं, सैमसंग ने इस दौरान लगभग $17 अरब का मोबाइल फोन निर्यात किया।
PLI स्कीम ने बदल दिया भारत का विनिर्माण परिदृश्य
भारत में वर्तमान में ऐपल के पाँच फैक्ट्री यूनिट्स हैं—तीन टाटा के और दो फॉक्सकॉन के। ये फैक्ट्रियां लगभग 45 कंपनियों की सप्लाई चेन का केंद्र हैं, जिनमें कई MSMEs भी शामिल हैं। ऐपल के निर्यात की वजह से अब स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यात वस्तु बन गया है। 2015 में यह 167वें स्थान पर था, लेकिन आज भारत से स्मार्टफोन निर्यात में वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
भारत बन रहा चीन और वियतनाम का विकल्प
PLI योजना के कारण ऐपल और सैमसंग ने अपने आपूर्तिकर्ताओं को भारत लाया है। ऐपल के विक्रेता मदरसन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉक्सकॉन, एटीएल और हिंडाल्को जैसे उद्योग अब आईफोन, मैकबुक, एयरपॉड्स और वॉच के पुर्जे भारत में निर्मित कर दुनिया भर में भेज रहे हैं। इससे चीन और वियतनाम पर निर्भरता कम हुई है और भारत पहली बार उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्यात करने लगा है।
सरकार ने पुष्टि की है कि PLI योजना मार्च 2025 में समाप्त होने के बाद भी उद्योग को समर्थन जारी रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि चीन और वियतनाम जैसी प्रतिस्पर्धी मार्केट्स के मुकाबले भारतीय निर्माताओं को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन प्रोत्साहन और सहयोग से यह स्थिति सुधरेगी।
निष्कर्ष:
PLI योजना ने भारतीय स्मार्टफोन उद्योग की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। ऐपल के $50 अरब के निर्यात और सैमसंग के $17 अरब के योगदान ने यह साबित कर दिया कि भारत अब मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात में एक वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है।