Thursday, January 22

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आमिर खान ने बिना जिम घटाया 18 किलो वजन, माइग्रेन के इलाज में अपनाई एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट बनी वरदान
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आमिर खान ने बिना जिम घटाया 18 किलो वजन, माइग्रेन के इलाज में अपनाई एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट बनी वरदान

मुंबई। बॉलीवुड के ‘परफेक्शनिस्ट’ कहे जाने वाले अभिनेता आमिर खान एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई फिल्म नहीं बल्कि उनका चौंकाने वाला फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन है। 61 वर्ष की उम्र के करीब पहुंच चुके आमिर खान ने बिना जिम, बिना क्रैश डाइट और बिना सख्त फिटनेस रूटीन के करीब 18 किलो वजन कम कर सबको हैरान कर दिया है। आमिर खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उनका वजन कम करना कोई लक्ष्य नहीं था। दरअसल, वह लंबे समय से माइग्रेन की समस्या से जूझ रहे थे और इसी के इलाज के लिए उन्होंने एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट अपनाई थी। यही डाइट उनके लिए दोहरी राहत लेकर आई—माइग्रेन में कमी और वजन में जबरदस्त गिरावट। माइग्रेन के इलाज में अपनाई खास डाइट आमिर के मुताबिक, उन्होंने माइग्रेन से राहत पाने के उद्देश्य से अपने खान-पान में बदलाव किया। उन्होंने ऐसी चीजें खाना शुरू किया जो शरीर में सूजन (इंफ्लेम...
बालकनी में कबूतरों का आतंक? ‘काली पन्नी’ का देसी तरीका बनेगा समाधान, एक रुपये का भी नहीं आएगा खर्च
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बालकनी में कबूतरों का आतंक? ‘काली पन्नी’ का देसी तरीका बनेगा समाधान, एक रुपये का भी नहीं आएगा खर्च

नई दिल्ली। घर की बालकनी, खिड़की या छत पर कबूतरों का डेरा डालना आजकल शहरी इलाकों की आम समस्या बन चुका है। कबूतरों की बीट न सिर्फ गंदगी फैलाती है, बल्कि इससे फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी रहता है। ऐसे में लोग महंगे नेट, नुकीले तार या स्पाइक्स लगवाते हैं, लेकिन अब बिना एक भी पैसा खर्च किए कबूतरों से छुटकारा पाने का एक देसी और कारगर तरीका चर्चा में है—‘काली पन्नी’ का उपाय। कबूतरों के डर पर आधारित है यह तरीका यह उपाय कबूतरों के स्वाभाविक डर पर आधारित है। दरअसल, कबूतर कौओं से बेहद डरते हैं क्योंकि कौए उनके अंडों और बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी डर का फायदा उठाकर काली पन्नी से कौए का आकार बनाकर कबूतरों को दूर भगाया जा सकता है। कैसे करें काली पन्नी का इस्तेमाल इसके लिए एक काली पॉलीथीन लें और उसमें रद्दी कागज, पुरानी रुई या कपड़ा भर दें। अब इसे इस तरह बांधें कि वह दूर से कौए ...
44 वर्ष की उम्र में भी बेटी से छोटी दिखीं ‘अंगूरी भाभी’, साड़ी में मराठी मुलगी बन छाईं शुभांगी अत्रे
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44 वर्ष की उम्र में भी बेटी से छोटी दिखीं ‘अंगूरी भाभी’, साड़ी में मराठी मुलगी बन छाईं शुभांगी अत्रे

मुंबई। लोकप्रिय टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ में अंगूरी भाभी के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री शुभांगी अत्रे एक बार फिर अपने सादगी भरे अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। 44 वर्ष की उम्र में भी शुभांगी अपनी 22 साल की बेटी को टक्कर देती नजर आ रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी साड़ी वाली तस्वीरों ने प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। ग्लैमर से दूर, पूरी तरह देसी अंदाज में नजर आईं शुभांगी ने इस बार साड़ी पहनकर मराठी मुलगी वाला रूप अपनाया। मिट्टी जैसे अर्थी टोन और रस्ट ऑरेंज रंग की सादी लेकिन बेहद एलिगेंट साड़ी में उनकी सहज सुंदरता देखते ही बन रही थी। साड़ी के साथ ब्लैक कंट्रास्ट पल्लू ने लुक को और निखार दिया। सादगी में छिपी खासियत शुभांगी की यह साड़ी कॉटन-सिल्क ब्लेंड फैब्रिक की प्रतीत होती है, जिसमें न ज्यादा कढ़ाई है और न ही भड़कीला डिजाइन। पूरी साड़ी पर बनी छोटी-छोटी ...
डायबिटीज और एसिडिटी की आम दवाएं बनीं खतरे की वजह, महिला का विटामिन B12 200 से नीचे गिरा — हर भारतीय के लिए जरूरी चेतावनी
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डायबिटीज और एसिडिटी की आम दवाएं बनीं खतरे की वजह, महिला का विटामिन B12 200 से नीचे गिरा — हर भारतीय के लिए जरूरी चेतावनी

नई दिल्ली। बीमारियों के इलाज में दवाओं की भूमिका अहम होती है, लेकिन बिना नियमित डॉक्टर फॉलोअप के लंबे समय तक दवाएं लेना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। डायबिटीज और गैस-एसिडिटी के इलाज में आमतौर पर दी जाने वाली मेटफॉर्मिन और ओमेप्राजोल जैसी दवाओं का ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 68 वर्षीय महिला का विटामिन B12 स्तर 200 pg/mL से काफी नीचे गिर गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति भारत जैसे देश में बेहद चिंताजनक है, जहां बड़ी संख्या में लोग सालों तक दवाएं लेते रहते हैं, लेकिन नियमित जांच और डॉक्टर से परामर्श को नजरअंदाज कर देते हैं। क्या है पूरा मामला केस स्टडी के मुताबिक महिला पिछले 6 वर्षों से टाइप-2 डायबिटीज के लिए दिन में दो बार 1000 mg मेटफॉर्मिन और पिछले 4 वर्षों से गैस्ट्रोइसोफेगियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) के लिए रोजाना 20 mg ओमेप्राजोल ले रही थी। लंबे समय तक इ...
47 की उम्र में भी रानी मुखर्जी का ‘काला जादू’, सादगी में दिखा 30 साल पुराना स्टाइल
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47 की उम्र में भी रानी मुखर्जी का ‘काला जादू’, सादगी में दिखा 30 साल पुराना स्टाइल

मुंबई। बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा और बंगाली सुंदरी रानी मुखर्जी भले ही लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हों, लेकिन जब भी वह सार्वजनिक रूप से नजर आती हैं, तो हर बार अपने अंदाज से सुर्खियां बटोर लेती हैं। अपनी आने वाली फिल्म ‘मर्दानी 3’ के प्रमोशन के दौरान रानी एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में मुंबई में फिल्म के प्रमोशनल इवेंट के दौरान 47 वर्षीय रानी मुखर्जी ने ऐसा स्टाइलिश लुक अपनाया कि फैंस एक बार फिर उनके दीवाने हो गए। करीब 30 साल के फिल्मी करियर के बाद भी रानी का अंदाज वही पुराना, दमदार और प्रभावशाली नजर आया। ब्लैक टॉप और पैंट्स में रानी ने साबित कर दिया कि सादगी के साथ भी स्टाइल का जादू चलाया जा सकता है। उनका यह ऑल-ब्लैक लुक न सिर्फ क्लासी था, बल्कि पावरफुल भी दिखाई दिया। रानी ने सिंपल लेकिन बॉडी-फिटेड ब्लैक टॉप पहना था, जिसमें कॉलर, वी-नेकलाइन और गोल्डन बटन जैसे एलिमेंट्स लुक को खास ...
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय की भांजी ने लूटी महफिल, मासूम अंदाज़ पर सबने लुटाया प्यार
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कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय की भांजी ने लूटी महफिल, मासूम अंदाज़ पर सबने लुटाया प्यार

बरसाना धाम। प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय इन दिनों अपने पारिवारिक और धार्मिक आयोजनों को लेकर लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में बरसाना धाम में श्री गिरधरलाल जी के विवाह उत्सव के बाद जहां इंद्रेश उपाध्याय और उनकी पत्नी शिप्रा के सादगीपूर्ण और भक्तिमय रूप की सराहना हो रही थी, वहीं अब इस आयोजन की सबसे बड़ी आकर्षण उनकी नन्ही भांजी श्रीवन्या बन गई हैं। पांच दिनों तक चले विवाह उत्सव के दौरान श्रीवन्या की मासूमियत और पारंपरिक परिधानों ने हर किसी का मन मोह लिया। इंद्रेश उपाध्याय की बहन श्रुति शर्मा की पुत्री श्रीवन्या हर दिन अलग-अलग देसी परिधानों में नजर आईं और श्रद्धा व सरलता से भगवान की सेवा करती दिखीं। सोशल मीडिया पर उनके फोटो और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। फ्लोरल लहंगे में बनीं आकर्षण का केंद्र विवाह समारोह के दौरान श्रीवन्या ने सफेद और गुलाबी रंग का फ्लोरल लहंगा पहना, जिसमें वह अत्य...
कड़ाके की ठंड में बिना पानी छुए लगाएं पोछा, हाथ नहीं कांपेंगे—काम आएंगे ये 5 स्मार्ट तरीके
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कड़ाके की ठंड में बिना पानी छुए लगाएं पोछा, हाथ नहीं कांपेंगे—काम आएंगे ये 5 स्मार्ट तरीके

नई दिल्ली। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच सुबह-सुबह घर की सफाई किसी चुनौती से कम नहीं होती। खासतौर पर फर्श पर पोछा लगाना सबसे मुश्किल काम बन जाता है, क्योंकि इसके लिए बार-बार ठंडे पानी में हाथ डालने पड़ते हैं। इससे न केवल हाथ सुन्न हो जाते हैं, बल्कि सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। हालांकि, अब तकनीक और कुछ आसान देसी जुगाड़ की मदद से बिना पानी को छुए भी घर की सफाई की जा सकती है। आइए जानते हैं ऐसे 5 कारगर तरीके, जिनसे सर्दियों में पोछा लगाना होगा आसान— 1. स्पिन मॉप से करें झंझटमुक्त सफाई आजकल बाजार में मिलने वाले स्पिन मॉप सर्दियों के लिए बेहद उपयोगी हैं। ये बाल्टी के साथ आते हैं, जिनमें मॉप धोने और निचोड़ने की अलग व्यवस्था होती है। पैर या हैंडल से दबाव डालते ही मॉप निचुड़ जाता है, जिससे हाथों को पानी में डालने की जरूरत नहीं पड़ती। 2. स्प्रे मॉप—बिना ...
नीता अंबानी को क्यों पसंद है बनारस की रंगकाट साड़ी? जानें खासियत और असली सोने का जादू
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नीता अंबानी को क्यों पसंद है बनारस की रंगकाट साड़ी? जानें खासियत और असली सोने का जादू

नई दिल्ली: नीता अंबानी का साड़ियों के लिए प्यार किसी से छिपा नहीं है। हर मौके पर उन्हें खूबसूरत साड़ी में देखा जाता है, लेकिन उनकी एक रंगकाट साड़ी इतनी खास है कि इसकी कहानी और कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। रंगकाट साड़ी क्यों खास है: बनारस की रंगकाट साड़ी हाथ से बनने वाली चुनिंदा साड़ियों में शामिल है। इस साड़ी की खासियत इसके रंगों के बहते हुए प्रभाव में है। रंगकाट का मतलब है ‘रंगीन ताना’, यानी साड़ी की बुनाई में अलग-अलग रंगों के धागों को इस तरह जोड़ा जाता है कि यह देखने में एक अद्भुत प्रभाव देती है। क्यों नहीं खरीद सकता हर कोई: नीता अंबानी जैसी बड़ी हस्तियां इसे आसानी से खरीद सकती हैं, लेकिन आम लोगों के लिए इसकी कीमत और बनावट इसे बेहद खास बनाती है। इसे शाही घरानों से भी जोड़ा जाता है और पहले यह दुल्हन के दहेज का हिस्सा भी होती थी। बनाने में लगते हैं महीनों: रंगकाट साड़ी को बनाने में कम से...
हर वक्त कूदता-फांदता है बच्चा? एक्सपर्ट ने बताया 1 आसान तरीका, जिससे होगा फोकस्ड और शांत
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हर वक्त कूदता-फांदता है बच्चा? एक्सपर्ट ने बताया 1 आसान तरीका, जिससे होगा फोकस्ड और शांत

नई दिल्ली: कई माता-पिता अपने बच्चों की अत्यधिक सक्रियता से परेशान रहते हैं। बच्चे पढ़ाई के समय एक जगह बैठने की बजाय लगातार कूदते-फांदते रहते हैं। चाइल्ड साइकोलॉजी एक्सपर्ट श्वेता गांधी के अनुसार, बच्चों की यह मूवमेंट उनकी विकास प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे रोकना गलत हो सकता है। लड़कों का दिमाग मूवमेंट से सीखता है: श्वेता गांधी कहती हैं कि लड़कों का दिमाग चीजों को मूवमेंट के जरिए समझता और सीखता है। कूदना, दौड़ना या चढ़ना उनके ब्रेन बैलेंस, बॉडी अवेयरनेस और इमोशनल रेग्युलेशन के लिए जरूरी है। एक्सपर्ट का आसान तरीका: श्वेता गांधी के अनुसार, हाईली एक्टिव बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा में चैनलाइज करने के लिए उन्हें भारी एक्टिविटी करवाएं। उदाहरण के लिए, खाने से पहले 10 फ्रॉग जंप या 10 जंपिंग जैक्स करवा सकते हैं। इससे उनकी एनर्जी सही तरीके से रिलीज होती है और नर्वस सिस्टम शांत होता है। मूवमेंट क...
2000 की क्रीम लगाने के बावजूद बार-बार फोड़े-फुंसियां? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया सस्ता और असरदार तरीका
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2000 की क्रीम लगाने के बावजूद बार-बार फोड़े-फुंसियां? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया सस्ता और असरदार तरीका

नई दिल्ली: चेहरे पर बार-बार फोड़े-फुंसियां निकलना कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। महंगी क्रीम और प्रोडक्ट्स लगाने के बावजूद अगर मुंहासों की समस्या बनी रहती है, तो इसका कारण केवल बाहर से इलाज करना है। न्यूट्रिशनिस्ट सलोनी के अनुसार, फोड़े-फुंसियों को कम करने का सबसे असरदार तरीका अच्छी डाइट है। डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करने से त्वचा को अंदर से हेल्थी रखा जा सकता है और महंगी क्रीम की जरूरत कम हो जाती है। सलोनी ने अपनी इंस्टाग्राम वीडियो में चार ऐसे फूड्स के बारे में बताया, जिन्हें नियमित खाने से मुंहासों की समस्या कम हो सकती है और त्वचा चमकदार बन सकती है। कद्दू के बीज: जिंक का प्राकृतिक स्रोत, जो त्वचा के लिए एंटीबायोटिक की तरह काम करता है। यह मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करता है और त्वचा में तेल (सीबम) के उत्पादन को नियंत्रित करता है। दही: ...