Thursday, May 14

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गोरखपुर की सनसनीखेज कहानी में बड़ा मोड़: 4 दिन बाद होगा मां का अंतिम संस्कार, बेटों पर लगे आरोपों की सच्चाई आई सामने, पिता ने माना- गलती मुझसे हुई

गोरखपुर। भरोहिया गांव में पिछले दिनों सामने आया वह मामला, जिसमें बेटों पर मां का अंतिम संस्कार करने से इनकार करने और शव को घर लाने से रोकने का आरोप लगा था, अब पूरी तरह उलट गया है। एनबीटी की ग्राउंड रिपोर्टिंग में खुलासा हुआ है कि जो कहानी ‘कलियुगी बेटों’ के रूप में पेश की गई, उसकी वास्तविक तस्वीर काफी अलग है। खुद परिवार के मुखिया भुआल गुप्ता ने स्वीकार किया कि गलती उनकी ही थी और बेटों पर लगाए कई आरोप भ्रामक साबित हुए।

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कैसे बढ़ा मामला?

जौनपुर के एक वृद्धाश्रम में रहने वाली भुआल गुप्ता की पत्नी का 19 नवंबर की रात निधन हो गया था। आरोप लगा कि बेटों ने मांगलिक कार्यक्रम होने का हवाला देकर शव घर लाने से मना कर दिया और 4 दिन बाद अंतिम संस्कार करने की बात कही। यह खबर मीडिया में तेजी से फैल गई और बेटों को जमकर आलोचना का सामना करना पड़ा।

वृद्धाश्रम प्रबंधन ने शव एंबुलेंस से गांव भेज दिया, जहां ग्रामीणों की मदद से मृतका को दफना दिया गया। इसी घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में रोष और विवाद खड़ा कर दिया।

एनबीटी की जांच में खुला सच

जब एनबीटी टीम मौके पर पहुंची और परिजनों व ग्रामीणों से बातचीत की तो मामला पूरी तरह अलग सामने आया। बड़े बेटे संजय कुमार मद्धेशिया ने बताया कि पिता भुआल ने वर्षों से कई लोगों से कर्ज ले रखा था। कर्जदारों के दबाव और घरेलू तनाव के कारण पिता मां को लेकर घर छोड़कर चले गए थे और परिवार से संबंध पूरी तरह टूट गया था। इस बीच उनका मोबाइल नंबर भी बदल गया और 17 महीनों तक संपर्क नहीं रहा।

संजय ने बताया कि—

“घर में शादी थी, लोगों ने सलाह दी कि इस समय शव घर लाना उचित नहीं होगा। इसलिए दो दिन बाद दाह संस्कार करने की बात कही गई। एंबुलेंस का किराया भी हमने ही दिया था। माता जी को गांव के श्मशान में दफनाया गया। बाद में पुतला बनाकर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाएगा।”

परिजनों का कहना है कि वृद्धाश्रम संचालक को माता-पिता ने आधी-अधूरी जानकारी दी, जिसे मीडिया में बड़े रूप में प्रस्तुत किया गया और बात का बतंगड़ बन गया।

पिता का बड़ा बयान: गलती मेरी हुई

मंगलवार को पंचायत के दौरान भुआल गुप्ता खुद सामने आए और स्वीकार किया—

“मैंने कई जगहों से कर्ज ले रखा था। कर्जदारों से बचने के लिए पत्नी के साथ घर छोड़ दिया। आवेश में आकर गलत फैसले लिए। बेटों ने मुझे नहीं छोड़ा, बल्कि अब वही मेरा सहारा हैं। तीनों बेटे मेरा कर्ज चुकाने और मुझे अपने साथ रखने को तैयार हैं।”

उन्होंने कहा कि पत्नी का अंतिम संस्कार अब पूरे विधि-विधान से किया जाएगा और उन्हें अपने बेटों से कोई शिकायत नहीं है।

ग्राम प्रधान ने भी रखी सच्चाई

ग्राम प्रधान दुर्गेश यादव ने बताया कि—

“मीडिया में अधूरी खबरों के चलते गलतफहमियां बढ़ीं। भुआल के कर्ज के कारण परिवार को भी कई बार अपमानित होना पड़ा। शादी के कारण शव फ्रीजर में रखने की बात उठी थी। बाद में परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में गांव के श्मशान में दफनाया गया।”

उन्होंने कहा कि मामला उतना बड़ा नहीं था, जितना बना दिया गया। घरेलू तनाव और आवेश में लिए गए फैसलों ने स्थिति को बिगाड़ दिया।

नतीजा:
इस पूरे प्रकरण में जहां पहले बेटों को दोषी ठहराया जा रहा था, वहीं अब तस्वीर बदल चुकी है। पिता के स्वीकारोक्ति और तथ्य सामने आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला गलतफहमियों और अधूरी सूचनाओं का परिणाम था। अब परिवार पंचायत के निर्णय के अनुसार साथ रहने और मां का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज से करने की तैयारी में है।

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