Wednesday, February 18

अयोध्या राम मंदिर में रामलला के ‘सूर्य तिलक’ की जिम्मेदारी अब CBRI रुड़की को

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम नवमी के अवसर पर प्रभु रामलला के मस्तक पर होने वाले भव्य ‘सूर्य तिलक’ कार्यक्रम का संचालन अब हर वर्ष केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की द्वारा किया जाएगा। इसके लिए मंदिर ट्रस्ट और CBRI के बीच 10 वर्षों का अनुबंध किया जाएगा।

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राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि सूर्य तिलक की परंपरा को तकनीकी रूप से त्रुटिहीन बनाए रखने के लिए वही संस्था जिम्मेदार होगी जिसने इसे विकसित किया है।

19 मार्च से अन्य मंदिरों में दर्शन

मिश्र ने कहा कि मंदिर परिसर में स्थित अन्य 15 मंदिरों में आम श्रद्धालुओं के दर्शन 19 मार्च से आयोजित राष्ट्रपति कार्यक्रम के बाद शुरू होंगे। सुरक्षा कारणों से पास प्रणाली लागू होगी और एक समय में अधिकतम 1000 श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का विशेष कार्यक्रम

नव संवत्सर के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंदिर परिसर में लगभग चार घंटे रहेंगी। इस दौरान वे मंदिर के दूसरे तल में राम रक्षा यंत्र की स्थापना करेंगी। साथ ही मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लगभग 400 श्रमिकों और तकनीकी कर्मचारियों का सम्मान किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय सितंबर में खुलेगा

राम मंदिर परिसर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का निर्माण कार्य सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। संग्रहालय में 20 गैलरियां बनाई जा रही हैं, जिनमें से एक विशेष गैलरी हनुमान जी को समर्पित होगी। इस गैलरी में 3D तकनीक के माध्यम से 12 मिनट की प्रस्तुति दिखाई जाएगी। हनुमान गैलरी में प्रवेश सीमित टिकट के आधार पर होगा, जबकि अन्य गैलरियों में प्रवेश निशुल्क रहेगा।

30 अप्रैल तक पूरे होंगे शेष निर्माण कार्य

मुख्य मंदिरों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। अब अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय, अस्थायी मंदिर और हुतात्मा स्मारक स्तंभ का निर्माण कार्य 30 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा बाउंड्री वॉल निर्माण के दौरान सीवर लाइन आदि संरचनाओं की स्थिति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त भूमि को लेकर अरविंदो आश्रम से बातचीत जारी है।

सूर्य तिलक परंपरा बनी रहेगी जारी

राम नवमी पर सूर्य की किरणों से प्रभु रामलला के मस्तक पर तिलक की वैज्ञानिक व्यवस्था अब स्थायी रूप से लागू होगी। इस तकनीक का संचालन अगले 10 वर्षों तक CBRI रुड़की करेगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए।

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