Tuesday, May 26

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विदेश में नौकरी के लिए “खतरनाक” बना यूरोप का क्रोएशिया, भारतीय वर्कर्स बोले – ‘गुलामों जैसा व्यवहार, मारपीट भी बढ़ी’

यूरोप में नौकरी करने के लिए जाने वाले भारतीय वर्कर्स की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ रही है। अच्छे वेतन, वर्क-लाइफ बैलेंस और स्वच्छ वातावरण के कारण हजारों भारतीय हर साल यूरोप के विभिन्न देशों में काम करने जाते हैं। लेकिन हर जगह हालात समान नहीं हैं। क्रोएशिया ऐसे ही देशों में शामिल है, जहां भारतीय वर्कर्स को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ निवासी 27 वर्षीय एक भारतीय वर्कर ने बताया कि पिछले साल उसे दो बार स्थानीय लड़कों के ग्रुप ने हमला किया। किसी ने उस पर थूक दिया, तो किसी ने उसे अपने देश लौट जाने की धमकी दी। इस दौरान उसके डिलीवरी बैग को भी चुराने की कोशिश की गई।

क्रोएशिया में वर्कर्स की कमी
क्रोएशिया में लंबे समय से कामगारों की कमी है, विशेषकर टूरिज्म सेक्टर में। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, यह यूरोपियन यूनियन के उन पांच देशों में शामिल है जहां आबादी सबसे तेजी से घट रही है। पिछले दशक में यहां करीब चार लाख लोग कम हो गए हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए एशियाई देशों से बड़ी संख्या में वर्कर्स आ रहे हैं, जिनमें भारतीय बड़ी संख्या में शामिल हैं। ये लोग टूरिज्म, केटरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहे हैं।

वर्कर्स के साथ बढ़ती मारपीट
स्थानीय विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी वर्कर्स को कई बार हिंसा और शोषण का सामना करना पड़ता है। खुद को ‘डीडी’ बताने वाले एक भारतीय वर्कर ने कहा, “मैं यहां काम और शांतिपूर्वक रहने के लिए आया था। हम यहां किसी की नौकरियां नहीं छीने हैं।” डीडी के व्हाट्सएप ग्रुप में कई लोग हर हफ्ते होने वाली मारपीट की घटनाओं की कहानियां साझा करते हैं। मारपीट की वजह से कुछ लोगों के जबड़े और पसलियां टूट चुकी हैं।

विदेशी वर्कर्स का शोषण
क्रोएशिया में काम करने वाले अधिकांश वर्कर्स प्राइवेट एजेंसियों या कंपनियों के जरिए यहां पहुंचते हैं। देश में वर्कर्स को कोई समर्थन नहीं मिलता। कुछ कंपनियां वर्कर्स को रहने के लिए जगह देती हैं, लेकिन इसके लिए भारी रकम वसूलती हैं। डिलीवरी राइडर हसन ने बताया कि वह 270 यूरो प्रति माह के रूम में पांच अन्य लोगों के साथ रह रहा है। नियम तोड़ने पर वर्कर्स पर भारी-भरकम फाइन भी लगता है। डीडी ने कहा, “ये पूरी तरह शोषण है। हमें हर रोज 12 घंटे और हफ्ते के सातों दिन काम करना पड़ता है। यहां कंपनियों के गुलाम बनकर रहना पड़ता है।”

क्रोएशिया में नौकरी करने से पहले भारतीय वर्कर्स को सतर्क रहने की जरूरत है। स्थानीय कानून और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूरी जानकारी लेना और विश्वसनीय एजेंसियों के जरिए ही यहां आने की सलाह दी जा रही है।

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