Saturday, February 14

ट्रंप प्रशासन ने 300 प्रवासियों की डिपोर्ट पर खर्च किए 40 मिलियन डॉलर, रिपोर्ट में खुलासा

वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति एक बार फिर विवादों में घिर गई है। हाल ही में जारी सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्रंप प्रशासन ने केवल 300 प्रवासियों को अन्य देशों में डिपोर्ट करने के लिए लगभग 40 मिलियन डॉलर खर्च किए।

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रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने पिछले साल तत्काल प्रवासियों को अमेरिका से निकालने के ट्रंप के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेज अभियान चलाए, जिससे डिपोर्टेशन की लागत असामान्य रूप से बढ़ गई।

तीसरे देशों में डिपोर्टेशन पर सवाल

रिपोर्ट में यह पाया गया कि माइग्रेंट्स को अन्य देशों में भेजने के लिए पांच देशों — इक्वेटोरियल गिनी, रवांडा, अल सल्वाडोर, इस्वातिनी और पलाऊ — को 4.7 मिलियन से 7.5 मिलियन डॉलर तक की एकमुश्त राशि दी गई। उदाहरण के लिए, मार्च में अल सल्वाडोर को 250 वेनेजुएलाई नागरिक भेजे गए, जबकि अन्य देशों को बहुत कम संख्या में डिपोर्ट किया गया।

सीनेटर जीन शाहीन के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक पैनल ने तीसरे देशों में डिपोर्टेशन की पद्धति को महंगी, अव्यवस्थित और खराब निगरानी वाला बताया। रिपोर्ट में इस नीति की गंभीर जांच की मांग की गई है और इसे बिना किसी रणनीति के अंधाधुंध लागू करने की आलोचना की गई है।

लापरवाही और खर्च पर सवाल

इमिग्रेशन एडवोकेसी ग्रुप्स ने भी थर्ड कंट्री पॉलिसी की कड़ी आलोचना की और इसे “लापरवाही भरा तरीका” बताया। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई मामलों में अमेरिका को माइग्रेंट्स को उनके होम कंट्री में वापस भेजने के लिए हवाई यात्रा का खर्च स्वयं उठाना पड़ा।

जीन शाहीन ने विशेष रूप से इक्वेटोरियल गिनी को 7.5 मिलियन डॉलर के भुगतान पर सवाल उठाया। यह वह समय था जब ट्रंप प्रशासन ने वहां के वाइस प्रेसिडेंट टियोडोरो टेडी न्गुएमा ओबियांग के साथ संबंध बनाने की कोशिश की थी। रिपोर्ट में उनकी भ्रष्टाचार की वजह से बदनाम छवि और खर्चीले जीवनशैली का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष साफ हैं: ट्रंप प्रशासन की तीसरे देशों में डिपोर्टेशन नीति महंगी, अव्यवस्थित और प्रभावहीन रही है।

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