
इंदौर (भागीरथपुरा): दो साल की मासूम सिया प्रजापति की दुखद मौत ने पूरे इलाके में शोक फैलाया है। दिसंबर के अंत में दूषित पानी पीने के कारण फैले उल्टी-दस्त और लिवर संक्रमण ने इस नन्हीं जान को छीन लिया।
पिता की व्यथा
सिया के पिता सूरज प्रजापति ने बताया, “मेरी लाडली, जिसे हम प्यार से ‘लड्डू’ कहते थे, काम से लौटने पर हमेशा गले लगती थी। कई मन्नतों के बाद हमें मिली यह बेटी बहुत चंचल थी। अब उसका न होना हमारे लिए अपूरणीय क्षति है।”
गंभीर लिवर संक्रमण
सूरज ने कहा कि सिया को पहले घरेलू उपचार और डॉक्टर के पास ले जाने के बाद भी आराम नहीं मिला। बाद में उसे सरकारी चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उसके लिवर में पस भर गया था, जो गंभीर संक्रमण का संकेत था।
आयुष्मान कार्ड की दिक्कत
इलाज के दौरान परिवार को आयुष्मान कार्ड सक्रिय कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सूरज ने बताया, “हमें KYC दस्तावेज जमा करके कार्ड एक्टिवेट करवाना पड़ा। हालाँकि, कार्ड एक्टिवेशन के बाद भी हमारी बेटी को बचाया नहीं जा सका।”
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज
सिया को दोनों सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिला, लेकिन कुछ दवाइयाँ बाहर से खरीदनी पड़ीं। दुखी पिता ने कहा, “सरकारी सहायता चाहे कितनी भी मिले, मेरी बेटी लौटकर नहीं आएगी।”
दूषित पानी से प्रभावित अन्य लोग
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस प्रकोप में अब तक 35 मौतें हुई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग इस त्रासदी की न्यायिक जांच कर रहा है।
वित्तीय सहायता
मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रकोप में जान गंवाने वाले 20 से अधिक परिवारों को 2 लाख रुपये प्रति परिवार की सहायता राशि प्रदान की है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ मृतक अन्य कारणों से मरे थे, लेकिन मानवीय आधार पर सभी को वित्तीय सहायता दी गई।
