
ढाका, 13 फरवरी 2026: बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के साथ ही देश में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को लेकर अब नई उम्मीदें और सवाल भी उठ रहे हैं।
भारतीय प्रतिक्रिया
भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तारिक रहमान को चुनाव में बड़ी जीत दिलाने के लिए बधाई दी। BNP के नेतृत्व में बांग्लादेश में स्थिर सरकार बनने की संभावना से भारत को राहत मिली है। BNP नेताओं ने भी स्पष्ट किया कि वे भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकते, क्योंकि भारत बांग्लादेश का मुख्य व्यापारिक भागीदार और सबसे बड़ा पड़ोसी देश है।
BNP की विदेश नीति
BNP की वरिष्ठ नेता अमीर खसरू महमूद चौधरी ने कहा:
“सरकार में आने के बाद BNP की प्राथमिकता देश की संस्थाओं को फिर से मजबूत करना होगी। पिछले 10 साल में बर्बाद हुए लोकतांत्रिक और वित्तीय संस्थानों को फिर से स्थापित करना जरूरी है। बांग्लादेश को सबसे पहले स्थिरता और शांति की आवश्यकता है।”
भारत के साथ रिश्तों के सवाल पर चौधरी ने कहा:
“हमारा किसी भी देश के साथ रिश्ता आपसी सम्मान, आपसी हित और दखल न देने की रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित होगा। देश-केंद्रित पॉलिसी न होने की वजह से पिछली सरकार को समस्याओं का सामना करना पड़ा।”
पाकिस्तान और पड़ोसी देशों के साथ संतुलन
बीएनपी का रुख पाकिस्तान के प्रति नरम है। हालांकि, BNP जानती है कि भारत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नए नेतृत्व का इरादा सभी पड़ोसी देशों के साथ दोस्ताना और संतुलित रिश्ते बनाए रखने का है। लेकिन दिल्ली और इस्लामाबाद के साथ संतुलन साधना BNP के लिए चुनौतीपूर्ण कूटनीतिक मार्ग साबित हो सकता है।
BNP नेताओं की टिप्पणी
स्टैंडिंग कमेटी के नजरुल इस्लाम खान ने कहा कि पीएम मोदी ने जनादेश को मान्यता दी है। भारत ने बांग्लादेश चुनाव नतीजों पर करीबी नजर बनाए रखी थी, खासतौर पर जब शेख हसीना के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते फिर से बन रहे थे।
निष्कर्ष: BNP सरकार का विदेश नीति का दृष्टिकोण स्पष्ट है – सबसे पहले बांग्लादेश, साथ ही पड़ोसी देशों के साथ संतुलित और सम्मानजनक रिश्ते। भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा अब नई BNP सरकार की रणनीति पर निर्भर करेगी।
