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अदालत ने दिल्ली, हरियाणा और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 25 मई यानी सुनवाई की अगली तारीख तक याचिका पर प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया है.

दिल्ली के एक व्यक्ति द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार का कहना था कि मरीज का इलाज जहां चल रहा है, उसी प्रदेश सरकार को आवश्‍यक दवा उपलब्‍ध करानी चाहिए.

नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. कोरोना महामारी की दूसरी लहर (Coronavirus Second Wave) के घातक एवं उसके बेहद संक्रामक रूप और राष्ट्रीय राजधानी के अधूरे स्वस्थ ढांचे ने कई लोगों को अपने इलाज के लिए पड़ोसी राज्य जाने के लिए मजबूर कर दिया. दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली सरकार (Delhi Government) की उस दलील पर की जिसमें कहा गया कि ऐसे रोगियों को उन राज्यों में इलाज के लिए जाना चाहिए जहां वह इलाज करा रहे हैं. न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा, ‘न्याय हित को ध्यान में रखते हुए मैं दिल्ली सरकार को याचिकाकर्ता के अनुरोध के प्रति कम से कम अगले कुछ दिन तक करुणामयी रुख अपनाने का निर्देश देती हूं.’ हाईकोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले पर 25 मई तक जवाब देने को कहा है. क्‍या था मामला? दरअसल, दिल्ली के एक निवासी ने गुरुग्राम में भर्ती अपने पिता के लिए ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल किए जा रहे एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन/एम्फोनेक्स-50 की मांग करते हुए याचिका दायर की थी. इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की. दिल्ली सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता के पिता का ट्रीटमेंट दिल्ली के अस्पताल में नहीं चल रहा है. लिहाजा, उसे हरियाणा के संबंधित अधिकारियों से दवा की मांग करनी चाहिए.

दिल्ली सरकार की दलीलों को किया खारिज कोर्ट ने दिल्ली सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पिता का एक महीने से अधिक समय से कोविड-19 का इलाज चल रहा है. वह जो दवा मांग रहा है, उससे रोगी के ठीक होने की उम्मीद है. लिहाजा, ‘इस मामले में जल्द से जल्द कदम उठाए जाने की जरूरत है.







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