
मुंबई: बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की जानी-मानी एक्ट्रेस और प्लेबैक सिंगर ममता मोहनदास का जीवन संघर्ष और हौसले की मिसाल है। जहां कुछ स्टार्स को सफलता आसानी से मिल जाती है, वहीं ममता की जिंदगी हमेशा संघर्ष और चुनौतियों से भरी रही।
फिल्मी सफर की शुरुआत
बहरीन में जन्मी और पली-बढ़ी ममता भारत ग्रेजुएशन करने आईं। 21 साल की उम्र में उन्हें मलयालम फिल्म ‘मयूखम’ (2005) में लीड रोल का मौका मिला। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, लेकिन ममता के अभिनय की प्रशंसा हुई। इसके बाद उन्हें छोटे-छोटे रोल और फिल्मों में ऑफर मिलने लगे। ममता ने ममूटी और सुरेश गोपी जैसी हस्तियों के साथ फिल्मों में काम किया, लेकिन असली पहचान ‘बिग बी’ (2007) से मिली।
सिंगिंग में भी छाया नाम
ममता ने अभिनय के साथ-साथ सिंगिंग में भी हाथ आजमाया। उनके गाने ‘डैडी मम्मी’ (विल्लू, 2009) के बाद उन्हें तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्मों में कई हिट गाने मिले।
कैंसर से दो बार जंग
ममता मोहनदास का जीवन चुनौतीपूर्ण रहा। 2009 में उन्हें हॉजकिन लिंफोमा का पता चला। उन्होंने इलाज कराया और डेढ़ साल में कैंसर मुक्त घोषित हुईं। नवंबर 2011 में उनकी शादी हुई, लेकिन एक साल बाद ही तलाक हो गया। 2013 में बोन मैरो ट्रांसप्लांट असफल होने के बाद कैंसर फिर लौट आया, लेकिन ममता ने हार नहीं मानी।
नई चुनौती: विटिलिगो
2023 में उन्हें विटिलिगो नाम की ऑटोइम्यून बीमारी हुई, जिससे त्वचा का रंग फीका पड़ने लगा। इसके बावजूद ममता ने अपनी सक्रियता और आत्मविश्वास नहीं खोया। इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा,
“मैं हर सुबह तुम्हारी किरण की चमक देखती हूं। मुझे अपना सब कुछ दे दो, क्योंकि मैं तुम्हारी कृपा की हमेशा ऋणी रहूंगी।”
विवाद और बयानबाजी
ममता का जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा। यौन उत्पीड़न के मामलों में उनके विवादित बयान पर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा,
“कहीं न कहीं पीड़िता भी जिम्मेदार होती है।”
फिल्मों की लिस्ट
कैंसर और व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद ममता ने 45 फिल्मों में काम किया। इसमें ‘महाराजा’, ‘ओट्टा’, ‘बांद्रा’, ‘जण गन मन’, ‘थिरप्पू’, ‘लालबाग’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय की खूब सराहना हुई। फिलहाल वे अपनी नई फिल्म ‘माय डियर सिस्टर’ पर काम कर रही हैं।
ममता मोहनदास न केवल एक सफल एक्ट्रेस और सिंगर हैं, बल्कि उनके जीवन संघर्ष ने उन्हें हिम्मत और हौसले की जीवंत मिसाल बना दिया है।
