
नई दिल्ली: अब बैंकिंग और फाइनैंस से जुड़े कामों के लिए बार-बार KYC (Know Your Customer) अपडेट कराने की झंझट खत्म होने वाली है। सरकार इस महीने के अंत तक सेंट्रल केवाईसी रेकॉर्ड्स रजिस्ट्री (CKYCRR 2.0) का नया वर्जन लॉन्च करने जा रही है। इसे डिजिलॉकर से जोड़ा जाएगा, जिससे दस्तावेजों का वेरिफिकेशन तुरंत और सीधे सरकारी डेटाबेस से संभव होगा।
क्या है खास बदलाव?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि CKYCRR 2.0 डिजिलॉकर के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट होगा। इसका मतलब है कि सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों की जांच और वेरिफिकेशन तुरंत हो सकेगा। इससे ग्राहकों को बार-बार KYC अपडेट कराने की आवश्यकता नहीं होगी। बैंक, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थान अब सीधे सरकारी डेटाबेस से दस्तावेज सत्यापित कर सकेंगे।
वेरिफिकेशन कैसे होगा?
डिजिलॉकर एक क्लाउड-आधारित सुरक्षित प्लेटफॉर्म है, जहां दस्तावेज स्टोर और वेरीफाई किए जाते हैं। CKYCRR 2.0 के तहत, संस्थान सीधे उन अधिकारियों से दस्तावेज की पुष्टि कर सकेंगे जिन्होंने उन्हें जारी किया है। सिस्टम में AI आधारित फोटो मिलान और PAN, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार डेटाबेस के जरिए API आधारित वेरिफिकेशन की सुविधा होगी। इससे डुप्लीकेट KYC रिकॉर्ड बनने से रोका जा सकेगा और संस्थानों को रिकॉर्ड जोड़ने या बंद करने की सुविधा भी मिलेगी।
सरल और सुरक्षित प्रक्रिया
साल 2025-26 के बजट में सरकार ने KYC प्रक्रिया को सरल और समय पर अपडेट करने के लिए नई पहल करने का ऐलान किया था। इस प्रक्रिया के तहत अब व्यक्तिगत और कानूनी संस्थाओं के KYC रिकॉर्ड सुरक्षित तरीके से डाउनलोड किए जा सकेंगे।
तैयारी और पहुंच
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, CERSAI ने CKYC रजिस्ट्री पर लगभग 8,000 संस्थाओं और ‘सिक्योरिटी इंटरेस्ट रजिस्ट्री’ पर करीब 6,000 संस्थाओं को जोड़ा है। CKYCRR 2.0 के साथ यह प्रणाली और भी मजबूत, तेज और सुरक्षित हो जाएगी।
इस बदलाव से ग्राहकों का समय बचेगा, KYC प्रक्रिया आसान होगी और वित्तीय संस्थानों को भी वेरिफिकेशन में सुविधा मिलेगी।
