
मुंबई। बॉलीवुड के उन कम ही चाइल्ड आर्टिस्ट में से एक हैं मास्टर राजू, जिन्होंने बचपन में ही फिल्म इंडस्ट्री में छाप छोड़ दी थी। 6 साल की उम्र में ही मुंबई के पॉश इलाके बांद्रा में घर खरीदने वाला यह बाल कलाकार, 10 साल की उम्र में नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीत चुका था। लेकिन बड़े होने पर मास्टर राजू को वह पहचान नहीं मिली, जो बचपन में हासिल हुई थी।
फहीम अजानी से मास्टर राजू तक
मास्टर राजू का असली नाम फहीम अजानी था। उनका परिवार फिल्म इंडस्ट्री से नहीं जुड़ा था। 5 साल की उम्र में उन्होंने गुलजार की फिल्म ‘परिचय’ के ऑडिशन में हिस्सा लिया। रोने के बावजूद उन्हें कास्ट कर लिया गया। इसी फिल्म के दौरान संजीव कुमार ने उन्हें ‘मास्टर राजू’ कहा, और नाम फेमस हो गया।
बचपन में ही उन्होंने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अनिल कपूर और जीतेंद्र जैसे दिग्गजों के साथ काम किया।
सफलता और फीस
मास्टर राजू ने गुलजार के अलावा श चोपड़ा, हृषिकेश मुखर्जी और बसु चटर्जी जैसी फिल्मों में भी काम किया। उनकी फिल्मों में शामिल हैं:
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‘अमर प्रेम’
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‘दाग- द पोएम ऑफ लव’
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‘दीवार’
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‘इंकार’
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‘खुद-दार’
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‘वो सात दिन’
पहली फिल्म के बाद उन्हें 10,000 रुपये फीस मिलती थी, जो 4 साल में बढ़कर 1 लाख रुपये हो गई। 1977 में बचपन में ही उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि उन्हें 1 लाख रुपये से अधिक फीस मिलने लगी।
बचपन में घर खरीदा, करियर की ऊँचाई
मास्टर राजू ने अपनी कमाई से बांद्रा में 11 लाख रुपये में घर खरीदा, जो उनके माता-पिता के लिए था। उन्होंने बताया, “मेरे पापा ने सही जगह में इन्वेस्टमेंट किया, जिसका फायदा आज भी मिल रहा है। मुझे कभी ऐसा दौर नहीं देखा कि मेरे पास काम न हो।”
बड़े होने पर बदलते रोल्स
9वीं क्लास में मास्टर राजू ने पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए एक्टिंग से ब्रेक लिया। बाद में ग्रे शेड कैरेक्टर करना शुरू किया। महेश भट्ट की फिल्म ‘साथी’ में नशेड़ी का रोल निभाने के बाद उन्हें यही टैग मिल गया।
बड़े होने के बावजूद वह हमेशा सपोर्टिंग कैरेक्टर ही बने। उन्होंने ‘बागी’, ‘अनाड़ी’, ‘बलवान’, ‘साजन चले ससुराल’, ‘दिलजले’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए।
टीवी और नारद का किरदार
टीवी पर मास्टर राजू ने ‘जय हनुमान’ में नारद का किरदार निभाया और 3000 एपिसोड तक इस रोल में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने कई शो में अलग-अलग भूमिकाएं निभाई।
मास्टर राजू की कहानी बताती है कि बचपन की सफलता और चमक हमेशा साथ नहीं रहती, लेकिन मेहनत और काबिलियत का सफर जीवन भर याद रहता है।
