
पटना/जहानाबाद: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में परिजनों ने एसआईटी की कार्रवाई पर बड़ा सवाल उठाया है। परिवार का आरोप है कि राज्य पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने उन्हें केवल डीएनए जांच के लिए नोटिस देकर परेशान करने की कोशिश की है, जबकि हाल ही में राज्य सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को सौंपने की सिफारिश की थी।
जहानाबाद की रहने वाली छात्रा छह जनवरी को पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित हॉस्टल में अचेत अवस्था में पाई गई थी। कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई। पुलिस ने छात्रावास के एक कर्मचारी को गिरफ्तार भी किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को कराने की सिफारिश की, लेकिन केंद्रीय एजेंसी अब तक जांच अपने हाथ में नहीं ले सकी।
परिवार के अनुसार, सोमवार देर रात SIT के अधिकारी मृतका के चाचा के घर डीएनए जांच का नोटिस लेकर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि गांव में टीम के आने की खबर फैलते ही अन्य रिश्तेदारों ने दरवाजा खोलने से इंकार कर दिया और विरोध शुरू हो गया। इसके बाद SIT को लौटना पड़ा।
परिजनों ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार ने बिहार विधानसभा में साफ कहा कि मामला सीबीआई को सौंपा जा चुका है, तो SIT किस आधार पर परिवार को नोटिस दे रही है। उनका कहना है कि यह परिवार को परेशान और अपमानित करने की सोच-समझकर की गई कोशिश है।
इसके साथ ही परिजन न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर अदालत आदेश दे तो पूरा गांव डीएनए जांच के लिए तैयार है। इस बीच, पटना में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
