Tuesday, February 10

अयोध्या: राम मंदिर परिसर के 15 मंदिरों में अभी नहीं बढ़े पुजारी, 20 अर्चकों से ही चल रहा पूजन कार्य

अयोध्या। राम मंदिर परिसर में स्थित लगभग 15 मंदिरों को मार्च महीने में आमजन के दर्शन के लिए खोलने की तैयारी चल रही है, लेकिन फिलहाल इन मंदिरों में अतिरिक्त प्रशिक्षित पुजारियों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। मंदिर ट्रस्ट का अर्चक (पुजारी) प्रशिक्षण कार्यक्रम अभी शुरू नहीं हुआ है, जिसके कारण वर्तमान में केवल 20 पुजारियों की टीम रोटेशन के आधार पर पूजा-अर्चन का कार्य संभाल रही है।

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मंदिर परिसर के परकोटा में बनाए गए इन मंदिरों में डिजाइन किए गए म्यूरल्स की फिनिशिंग और सफाई का कार्य अंतिम चरण में है। इस कार्य के पूरा होने के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोले जाएंगे।

वर्तमान पूजन व्यवस्था

मंदिर परिसर के परकोटा के 6 मंदिरों, शेषावतार मंदिर और कुबेर टीला स्थित भगवान शिव मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना की जा रही है। कुल 20 पुजारी तैनात हैं, जिनमें से 4 वरिष्ठ पुजारी हैं, जो पिछले 30 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। अन्य 16 पुजारी नए प्रशिक्षित हैं, जिन्हें मंदिर ट्रस्ट के प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद तैनात किया गया है। प्रधान पुजारी सत्येंद्र दास के निधन के बाद प्रधान पुजारी का पद समाप्त कर दिया गया है।

वेतन विवाद

सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ पुजारियों को लगभग 37,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि 6 माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद तैनात 16 नए पुजारियों को 42,000 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। इस असमानता को लेकर वरिष्ठ पुजारियों में असंतोष है। उनका कहना है कि 35 वर्षों से प्रभु रामलला की सेवा करने के बावजूद उन्हें नए पुजारियों से कम वेतन मिल रहा है, जबकि काम समान है।

मंदिर ट्रस्ट की अर्चक प्रशिक्षण योजना

राम मंदिर ट्रस्ट ने दिसंबर 2023 में अर्चक प्रशिक्षण योजना शुरू की थी। पहले बैच में 22 पुजारियों ने 6 माह का प्रशिक्षण पूरा किया, जिनमें से 16 अर्चकों को मंदिर में तैनात किया गया। जून 2025 में दूसरे बैच के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन प्रशिक्षण अभी शुरू नहीं हुआ है। भविष्य में अतिरिक्त पुजारियों की आवश्यकता पड़ने पर केवल पहले बैच के 4 प्रशिक्षित अर्चक ही उपलब्ध होंगे।

रोटेशन में पूजा कार्य

मंदिर सूत्रों के अनुसार, सभी 20 अर्चक 10-10 के दो ग्रुप में दो पालियों में ड्यूटी कर रहे हैं। रोटेशन के आधार पर रामलला, राम दरबार, परकोटा के 6 मंदिर, शेषावतार मंदिर और कुबेर टीला के भगवान शिव मंदिर सहित कुल 10 मंदिरों में पूजा-अर्चन कराया जा रहा है।

अर्चक प्रशिक्षण के मानक

प्रशिक्षण 6 माह का निशुल्क आवासीय होता है। इसमें 20 से 30 वर्ष आयु के युवक, जिन्होंने 5 वर्ष की गुरुकुल शिक्षा ली हो, भाग ले सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु अर्चकों को मासिक 2,000 रुपये मानदेय भी मिलता है। प्रशिक्षण रामानंदी पद्धति के अनुसार किया जाता है, जिसमें पूजा का अनुभव भी मंदिर में प्रत्यक्ष रूप से कराया जाता है।

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