
संभल (उत्तर प्रदेश): संभल हिंसा मामले में घायल युवक आलम के पिता यामीन की शिकायत पर सीजेएम कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ अनुज चौधरी हाईकोर्ट पहुंचे हैं।
सरकार की दलील
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि आलम के शरीर से जो बोर की गोली मिली, वह पुलिस इस्तेमाल नहीं करती है। आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला (Forensic Lab) की जांच से यह स्पष्ट हो गया कि पुलिस पर लगे आरोप निराधार हैं।
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने सुनवाई के दौरान कहा कि सीजेएम ने बीएनएसएस की धारा 175 के अनिवार्य सुरक्षा उपायों की अनदेखी की। इस धारा के तहत किसी लोकसेवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले दो चरणों का पालन आवश्यक है:
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वरिष्ठ अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त करना।
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घटना की परिस्थितियों पर लोकसेवक के पक्ष और बयानों पर विचार करना।
घटना का संक्षिप्त विवरण
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24 नवंबर 2024 को आलम ठेला लेकर घर लौट रहा था।
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उसी समय जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में प्रदर्शन चल रहा था।
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भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस ने गोलियां चलाई।
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आलम ने भागने की कोशिश की तो कथित रूप से उसके शरीर में गोली लगी।
अब क्या होगा
हाईकोर्ट में अब अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के पक्ष में दलील पेश की जाएगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ में हो रही है।
यह मामला संभल हिंसा और पुलिस की कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
