
तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने हथियारों और सैन्य संसाधनों की संख्या दोगुनी से अधिक कर दी है। माना जा रहा है कि अगर कूटनीतिक बातचीत सफल नहीं होती है, तो क्षेत्र में युद्ध की संभावना बढ़ सकती है।
अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को पहले ही ईरान के नजदीक भेज दिया है। इसके साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर – USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS माइकल मर्फी, और USS स्प्रुअंस – अरब सागर में तैनात किए गए हैं। अमेरिकी मीडिया पर इन जहाजों की तस्वीरें साझा की गई हैं।
अमेरिका ने कैरियर ग्रुप के साथ लगभग 5,700 सैन्य कर्मियों को भी तैनात किया है। इसके अलावा फारस की खाड़ी में तीन लिटोरल लड़ाकू जहाज – USS सांता बारबरा, USS कैनबरा और USS तुलसा – भी मौजूद हैं। इन जहाजों का काम ईरान द्वारा लगाए गए समुद्री माइंस को ढूंढना और निष्क्रिय करना है।
अमेरिकी एयर और मिसाइल क्षमताएं
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F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट मिडिल ईस्ट में तैनात।
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E-11A कम्युनिकेशन एयरक्राफ्ट, P-8 पोसाइडन सर्विलांस प्लेन, और E-3G सेंट्री सर्विलांस प्लेन क्षेत्र में सक्रिय।
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THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) सिस्टम और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम तैनात, ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने के लिए तैयार।
इसके अलावा, ब्रिटेन ने अपने यूरोफाइटर टाइफून जेट्स को कतर में डिफेंसिव मोड में तैनात किया है। जॉर्डन के मुवफ़्फ़ाक साल्टी एयर बेस पर F-15, MQ-9 रीपर ड्रोन और A-10C थंडरबोल्ट II एयरक्राफ्ट तैनात हैं।
कूटनीति और तनाव
ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन को 60 प्रतिशत से कम करने की पेशकश की और अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट मांगी। अमेरिका ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
फिर भी अमेरिकी मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन ने ईरान के नजदीकी समुद्री इलाकों से दूर रहने के लिए कमर्शियल जहाजों को एडवाइजरी जारी की। इसका मतलब है कि अमेरिका पूरी मिडिल ईस्ट में युद्धपोत और हथियार प्लेटफॉर्म तैनात कर ईरान पर प्रेशर बना चुका है।
ईरानी लीडरशिप भी जानती है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो युद्ध लंबा और घातक हो सकता है। इसलिए ईरान अब अमेरिकी मांगों को मानने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।
