कोरोना की दवाई का प्रोडक्शन बढ़ाने पर विचार.

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कोरोना की दवाई का प्रोडक्शन बढ़ाने पर विचार.

कोविड-19 की पहली लहर के दौरान ही पीएम के निर्देश पर DRDO ने एंटी कोरोना ड्रग पर काम करना शुरू कर दिया था. अब ये दवा 2 DG नाम से लॉन्च हो चुकी है. दवा के बेहतरीन रेस्पॉन्स को देखते हुए अब सरकार इसके उत्पादन को बढ़ाने के बारे में विचार कर रही है.

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के इलाज में गेमचेंजर बनकर आई डीआरडीओ की देसी दवाई 2 DG का मरीजों पर अच्छा असर दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि दवा की मांग भी बढ़ रही है. 10 हजार सैशे से दवाई की लॉन्चिंग हुई है, जिसके बाद मई के अंत तक इसका दूसरा भी बैच रिलीज होने की उम्मीद है. कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए अब सरकार 2 DG दवा के उत्पादन को बढ़ाने के लिए तीन से चार फर्म्स को प्रोडक्शन के लिए मंजूरी देने के बारे में विचार कर रही है. सरकारी सूत्रों की ओर से कहा गया है कि डीआरडीओ की दवा के लॉन्च होने के बाद से ही इसकी डिमांड काफी ज्यादा बढ़ी हुई है. मरीजों और उनके तीमारदारों की ओर से सकारात्मक अनुभव सामने आ रहे हैं. 3-4 फर्म्स को मिल सकती है मंजूरी चूंकि दवा का लिमिटेड स्टॉक ही लॉन्च किया गया है, ऐसे में मरीजों को बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाई उपलब्ध नहीं हो रही है. ऐसे में दवा का उत्पादन तेजी से बढ़ाने पर विचार हो रहा है. सरकार इसके लिए 3 से 4 और फर्म्स को दवा के उत्पादन की मंजूरी देने वाली है. जून के दूसरे हफ्ते तक दवा के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. 2 DG का पहला बैच एम्स और डायरेक्टर जनरल ऑफ द आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज़ को दिया गया, जबकि कुछ सैशे रिजर्व रखे गए. 2 DG को मिल रही है अच्छी प्रतिक्रियाकोरोना महामारी के खिलाफ अहम लड़ाई में भारत को एक और बड़ा हथियार 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) दवा के तौर पर मिल गया है . यह एक एंटी कोरोना ड्रग है. जिसे देश के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने विकसित किया है. इसके आपात इस्तेमाल की मंजूरी भारत सरकार ने दी है. ये दवा कोरोना मरीजों के अस्पताल में एडमिट होने के दिन तो कम कर ही देती है, उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता को भी काफी कुछ घटा देती है. दवा पाउडर के तौर पर सैशे में आती है, जिसे पानी में घोलकर मरीज को पीना होता है. डीआरडीओ का कहना है कि जून के दूसरे हफ्ते दवा निजी अस्पतालों और बाजार में भी उतारने की योजना है. इसकी कीमत भी लोगों की क्षमता के हिसाब से कम ही रखी गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिल सके.







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