
जयपुर: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए 5वीं और 8वीं कक्षा में ऑटोमेटिक प्रमोशन की व्यवस्था समाप्त कर दी है। अब इन दोनों कक्षाओं में न्यूनतम अंक नहीं पाने वाले विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा। यह नई व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी।
ड्रॉपआउट कम करने और लर्निंग आउटकम सुधारने का प्रयास:
शिक्षा विभाग का कहना है कि ऑटो प्रमोशन के कारण कई छात्र बिना पर्याप्त तैयारी के अगली कक्षा में पहुंच जाते थे। कमजोर आधार के चलते वे पढ़ाई जारी नहीं रख पाते और स्कूल छोड़ देते थे। इस नई व्यवस्था के तहत 5वीं कक्षा में पास होने के लिए प्रत्येक विषय में कम से कम 32 अंक अनिवार्य होंगे। विभाग का उद्देश्य है कि विद्यार्थी बुनियादी स्तर पर आवश्यक ज्ञान और कौशल हासिल करें, ताकि आगे की कक्षाओं में उन्हें कठिनाई न हो।
छात्र, शिक्षक और अभिभावक—तीनों की जवाबदेही तय:
शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल के अनुसार, इस बदलाव से केवल विद्यार्थियों ही नहीं बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों की भी जवाबदेही तय होगी। अभिभावकों को बच्चों की नियमित पढ़ाई और होमवर्क पर ध्यान देना होगा। वहीं, अगर छात्र असफल होते हैं, तो शिक्षकों की शिक्षण प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी और पढ़ाई की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
रिमेडियल टीचिंग और दूसरी परीक्षा का प्रावधान:
नई व्यवस्था में न्यूनतम अंक नहीं लाने वाले छात्रों को तुरंत फेल नहीं किया जाएगा। ऐसे छात्रों को 45 दिन से दो महीने तक विशेष शिक्षण (रिमेडियल टीचिंग) दिया जाएगा। इसके बाद उनकी दोबारा परीक्षा होगी। दूसरी परीक्षा में सफल होने पर ही उन्हें अगली कक्षा में प्रवेश मिलेगा।
आरटीई के छात्रों को राहत:
निजी स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को फेल होने पर सरकार उनकी पुनः फीस वहन करेगी। किसी भी सरकारी या आरटीई छात्र को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि ऑटो प्रमोशन खत्म करने से बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार आएगा।