Monday, February 9

राजस्थान में ‘181’ पर शिकायतों का अंबार, छोटे जिले आगे निकले, राजधानी जयपुर निस्तारण में सबसे पीछे

जयपुर। राजस्थान में आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए चल रही राजस्थान संपर्क (181) शिकायत प्रणाली पर दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, शिकायतों के निस्तारण के मामले में छोटे और मध्यम जिले बड़े शहरों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। राजस्थान संपर्क पोर्टल के ताजा आंकड़ों में जहां सवाई माधोपुर, भरतपुर और अलवर जैसे जिलों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, वहीं राज्य की राजधानी जयपुर शिकायत निस्तारण के प्रतिशत के लिहाज से सबसे पीछे रहा है।

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हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं राजस्थान संपर्क पोर्टल पर आमजन की शिकायतें सुनने पहुंचे थे और अधिकारियों को त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राजधानी में लंबित शिकायतों का आंकड़ा चिंताजनक बना हुआ है।

सवाई माधोपुर का प्रदर्शन सबसे अव्वल

राजस्थान संपर्क पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार 23 मार्च से 31 दिसंबर 2025 की अवधि में सवाई माधोपुर जिले ने शिकायत निस्तारण में राज्यभर में पहला स्थान हासिल किया।

सवाई माधोपुर में कुल 88,605 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 84,363 शिकायतों का समाधान कर दिया गया। जिले का निस्तारण प्रतिशत 95.21% रहा।

सीमित संसाधनों के बावजूद जिले का यह प्रदर्शन प्रशासन की निगरानी और तेज कार्यवाही को दर्शाता है।

शिकायत निस्तारण में टॉप 5 जिले

राज्य में शिकायतों के समाधान के मामले में शीर्ष पर रहने वाले जिले इस प्रकार रहे—

रैंक जिला कुल शिकायतें निस्तारित शिकायतें निस्तारण प्रतिशत
1 सवाई माधोपुर 88,605 84,363 95.21%
2 भरतपुर 95,330 90,729 95.16%
3 टोंक 95,276 90,466 94.95%
4 भीलवाड़ा 1,04,089 99,107 95.21%
5 अलवर 86,893 82,433 94.87%

अलवर, भरतपुर और टोंक भी रहे आगे

आंकड़ों के अनुसार अलवर जिले ने 94.87%, जबकि भरतपुर ने 95.16% शिकायतों का निस्तारण किया। वहीं टोंक और भीलवाड़ा भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल रहे।

अधिकारियों का मानना है कि इन जिलों में फील्ड स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग, तेजी से सत्यापन प्रक्रिया और समयबद्ध कार्यवाही इसके प्रमुख कारण रहे हैं।

जयपुर में सबसे ज्यादा शिकायतें, लेकिन प्रदर्शन सबसे कमजोर

राज्य की राजधानी जयपुर में शिकायतों की संख्या सबसे अधिक रही, लेकिन निस्तारण प्रतिशत के लिहाज से जयपुर का प्रदर्शन कमजोर रहा।

जयपुर में कुल 2,87,917 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 2,69,382 शिकायतों का समाधान किया गया। हालांकि, निस्तारण प्रतिशत सिर्फ 93.56% रहा।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जयपुर में 18,536 शिकायतें लंबित हैं, जो पूरे राज्य में सबसे ज्यादा है।

सबसे खराब प्रदर्शन वाले 5 जिले

शिकायत निस्तारण प्रतिशत के आधार पर सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिले इस प्रकार रहे—

रैंक जिला कुल शिकायतें निस्तारित शिकायतें निस्तारण प्रतिशत
1 जयपुर 2,87,917 2,69,382 93.56%
2 जोधपुर 1,77,319 1,66,519 93.91%
3 सीकर 92,960 87,837 94.49%
4 कोटा 94,674 89,684 94.73%
5 दौसा 1,01,128 96,534 95.45%

बड़े शहरों में ज्यादा दबाव, समाधान में देरी

विशेषज्ञों के अनुसार जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में शिकायतों की संख्या अधिक होने के कारण प्रशासन पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे समयबद्ध समाधान में कठिनाई आती है।

हालांकि, आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि छोटे जिलों में संसाधन सीमित होने के बावजूद शिकायतों के समाधान में तेजी देखी जा रही है।

मुख्य सचिव बोले- राष्ट्रीय स्तर का मॉडल है राजस्थान संपर्क

राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजस्थान संपर्क प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि इसकी नियमित समीक्षा मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।

मुख्य सचिव के अनुसार—

  • प्रतिमाह 2.5 से 3 लाख शिकायतों का निस्तारण हो रहा है।

  • कई दिनों में यह संख्या 10 हजार से अधिक रहती है।

  • औसतन शिकायत समाधान में 14 दिन का समय लग रहा है।

  • नागरिक संतुष्टि स्तर 63 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि शहरी जिलों में शिकायतों का भार अधिक होने के कारण वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

निष्कर्ष

राजस्थान संपर्क (181) प्रणाली जनता की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। लेकिन आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि छोटे जिले शिकायत निस्तारण में तेज और बेहतर साबित हो रहे हैं, जबकि जयपुर जैसे बड़े शहरों में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है

अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन राजधानी सहित बड़े जिलों में शिकायतों के समाधान को तेज करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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