
नई दिल्ली: अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी ने 80 गेंदों में 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर भारत को छठा खिताब दिलाया। इस पारी के पीछे उनके बचपन के कोच मनीष ओझा की सलाह और तकनीकी सुधार का बड़ा योगदान रहा।
कोच का चुनौतीपूर्ण संदेश बना प्रेरणा
सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 68 रन बनाने के बाद कोच मनीष ओझा ने वैभव को व्हाट्सएप पर एक संदेश भेजा। संदेश में लिखा था कि यह शायद तुम्हारा पहला टूर्नामेंट होगा जहां तुम एक भी शतक नहीं लगा पाओगे। उन्होंने वैभव को हिदायत दी कि फाइनल में एक बार सेट होने के बाद ही बड़ी पारी खेलकर लौटो। वैभव इस संदेश से प्रेरित हुए और फाइनल में 15 चौकों और 15 छक्कों की मदद से मात्र 55 गेंदों में टूर्नामेंट का दूसरा सबसे तेज शतक जड़कर 175 रनों का विशाल स्कोर बनाया।
पुल शॉट की तकनीकी खामी को किया सुधार
कोच ओझा ने फाइनल से पहले वैभव की पुल शॉट तकनीक में एक छोटी खामी को सुधारने पर ध्यान दिया। वैभव का सिर पिछे झुकने और पिछला घुटना दबने की वजह से वे शॉर्ट गेंदों पर अपने शॉट को ठीक से नहीं खेल पा रहे थे। कोच ने उन्हें सलाह दी कि गेंद की तरफ सिर रखें और हाथों को पूरा विस्तार दें, जिससे शॉट में ताकत और नियंत्रण दोनों आए।
14 साल की उम्र में कमाल
वैभव अभी 15 साल भी नहीं हुए हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड किसी सीनियर खिलाड़ी से कम नहीं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में पहले ही चार शतक जड़े हैं, जिनमें आईपीएल और विजय हजारे ट्रॉफी के शतक शामिल हैं। कोच का कहना है कि वैभव सीखने की अद्भुत क्षमता रखते हैं और तकनीकी बातें बहुत जल्दी समझ लेते हैं।
ग्लैमर से दूर, सिर्फ खेल पर ध्यान
कम उम्र में मिली बड़ी सफलता के बावजूद वैभव ग्लैमर की दुनिया से दूर हैं। उनका समय लगातार अंडर-19 टूर्नामेंट्स, एशिया कप और रणजी ट्रॉफी में व्यस्त रहा। परिवार और कोच उनकी सादगी और खेल के प्रति एकाग्रता बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। यही वजह है कि वे भविष्य में भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन सकते हैं।