
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे टैरिफ विवाद का अंत शनिवार को औपचारिक रूप से हो गया। वाइट हाउस की ओर से जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) के ढांचे पर सहमति जताई है।
इस समझौते की सबसे बड़ी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर है, जिसके तहत रूस से तेल आयात के कारण भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है।
मुख्य बिंदु:
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भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने का इरादा रखता है, जिसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोयला शामिल होंगे।
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भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को खत्म या कम करने की सहमति दी है। इसमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं।
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अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 18% की पारस्परिक टैरिफ दर लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें कपड़ा और परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, कार्बनिक रसायन, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी शामिल हैं।
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जेनेरिक दवाएं, रत्न-हीरे और विमान पुर्जों पर अमेरिकी टैरिफ हटा दिए जाएंगे, बशर्ते दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत सफल हो।
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समझौते का मुख्य फोकस नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाना और व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। भारत ने अमेरिकी मेडिकल उपकरणों और ICT उत्पादों पर लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को हटाने का वचन दिया है।
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दोनों देशों ने डिजिटल व्यापार में पारस्परिक लाभ सुनिश्चित करने और नियमों को सरल बनाने पर भी सहमति जताई है।
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अमेरिका और भारत आपूर्ति श्रृंखला में लचीलेपन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सुरक्षा में तालमेल मजबूत करेंगे।
वाइट हाउस ने कहा कि यह अंतरिम समझौता द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में नए रणनीतिक युग की शुरुआत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को स्थिरता मिलेगी और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लंबी अवधि में फायदा होगा।