
सैन फ्रांसिस्को: ऐपल आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शुमार है। इसके पीछे स्टीव जॉब्स की दूरदर्शिता और विजन का बड़ा हाथ है। ऐपल के पहले iPod से जुड़ा एक किस्सा आज भी टेक जगत में उदाहरण के रूप में दिया जाता है, जिसमें जॉब्स ने अपने इंजीनियर्स को “नामुमकिन” शब्द कहने पर सबक सिखाया।
iPod को पतला बनाने का अनोखा तरीका:
जब ऐपल के पहले iPod पर काम चल रहा था, जॉब्स ने इंजीनियर्स के तैयार किए गए प्रोटोटाइप को मछलियों के पानी के टैंक में फेंक दिया। उन्होंने यह दिखाने के लिए किया कि डिवाइस के अंदर अभी भी खाली जगह है। जैसे ही iPod पानी में गया, उसमें से हवा के बुलबुले ऊपर आने लगे।
स्टीव ने इंजीनियर्स की ओर इशारा करते हुए कहा, “ये बुलबुले बता रहे हैं कि डिवाइस को और पतला बनाया जा सकता है।” इसके बाद इंजीनियर्स ने गैर जरूरी जगहों को कम करके iPod को और स्लिम बनाया।
Apple का नामुमकिन को मुमकिन बनाने वाला विजन:
स्टीव जॉब्स के लिए Apple सिर्फ एक डिवाइस बनाने वाली कंपनी नहीं थी। उनके लिए यह नामुमकिन को मुमकिन बनाने का दूसरा नाम था। इंजीनियर्स द्वारा “नामुमकिन” कहना उनके लिए बहाना भर था। जॉब्स की यही सोच आज भी Apple के डिज़ाइन और प्रोडक्ट्स में देखी जा सकती है।
iPhone Air में जॉब्स की विरासत:
स्टीव का वही दशकों पुराना ‘नो एयर स्पेस’ वाला सबक अब iPhone 17 Air में जीवित है। ऐपल ने दुनिया का सबसे पतला iPhone लॉन्च करके यह साबित कर दिया कि जहां बाकी कंपनियां नामुमकिन मानती हैं, ऐपल उसे मुमकिन बनाकर ही छोड़ता है। यह फोन केवल गैजेट नहीं, बल्कि उस विजन की जीत है जो टेक्नोलॉजी को सरल, मिनिमलिस्ट और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना मानता है।