नारदा स्टिंग मामले में सीबीआई ने 13 लोगों पर FIR दर्ज है.

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नारदा स्टिंग मामले में सीबीआई ने 13 लोगों पर FIR दर्ज है.

तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के नेताओं पर ये फैसला कोलकाता हाईकोर्ट (Kolkata High Court) के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की पीठ ने सुनाया है. हालांकि इस फैसले को सुनाने में पीठ बंटी हुई दिखी.

कोलकाता. नारदा स्टिंग मामले (Narada Sting Operation) में बड़ा फैसला सुनाते हुए कोलकाता हाईकोर्ट (Kolkata High Court) ने गिरफ्तार किए गए तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के चारों नेताओं को हाउस अरेस्ट (House Arrest) करने के आदेश जारी कर दिएहैं. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर ये फैसला कोलकाता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की पीठ ने सुनाया है. हालांकि इस फैसले को सुनाने में पीठ बंटी हुई दिखी. न्‍यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी, टीएमसी नेता सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा, फिरहाद हाकिम और पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी को जमानत देने के लिए सहमत थे. लेकिन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल जमानत के खिलाफ थे. अब इस मामले की सुनवाई बड़ी पीठ करेगी, तब तक टीएमसी नेताओं के नजरबंद रखने का आदेश दिया गया है. बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने सोमवार रात को सभी नेताओं की जमानत पर रोक लगा दी थी. इसे भी पढ़ें :- Narada Sting Case: क्या है बंगाल का नारदा घोटाला, जिसमें घिरे TMC के बड़े-बड़े नेता

क्या है नारदा स्टिंग मामला नारदा टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में एक कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आए. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि फिरहाद हाकिम को स्टिंग ऑपरेशन करने वाले से पांच लाख रुपये रिश्वत लेने की बात स्वीकार करते हुए देखा गया, जबकि मदन मित्रा और सुब्रत मुखर्जी को कैमरे पर पांच-पांच लाख रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया. शोभन चटर्जी को स्टिंग करने वाले से चार लाख रुपये लेते हुए देखा गया. सीबीआई के अनुसार आईपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा को भी कैमरे पर पांच लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया. इसे भी पढ़ें :- नारदा स्टिंग केस : नहीं मिली ममता बनर्जी के विधायक और मंत्रियों को राहत, जेल में ही कटेगी एक और रात
2017 में दर्ज सीबीआई की FIR में 13 लोगों के नाम यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था. हालांकि, चुनाव पर इसका असर नहीं पड़ा और ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी हुई. सीबीआई ने 16 अप्रैल 2017 को दर्ज प्राथमिकी में 13 लोगों को नामजद किया है जिनमें वर्ष 2014 के ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे तृणमूल नेता हाकिम, मुखर्जी, मित्रा और चटर्जी शामिल हैं. हकीम और मुखर्जी हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में दोबारा जीते हैं, जबकि चटर्जी तृणमूल छोड़ भाजपा में शामिल हो गए. अधिकारियों ने बताया कि आठ आरोपियों पर मामला चलाने की मंजूरी अब तक नहीं मिली है क्योंकि वे सभी संसद सदस्य हैं. उच्च न्यायालय ने 16 अप्रैल 2017 को ही स्टिंग ऑपरेशन की जांच सीबीआई को करने के निर्देश दिए थे.







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