Friday, February 6

ऑफिस में साथ काम कर रहा इंसान या AI? मस्क का ‘ह्यूमन एमुलेटर’ मचाने वाला है सनसनी

इलॉन मस्क की AI कंपनी xAI एक ऐसे क्रांतिकारी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जो भविष्य में दफ्तरों का स्वरूप हमेशा के लिए बदल सकता है। पूर्व इंजीनियर सुलेमान घोरी के वायरल पॉडकास्ट ने इस प्रोजेक्ट की झलक दी। उन्होंने बताया कि मस्क की टीम ‘ह्यूमन एमुलेटर’ (Human Emulator) विकसित कर रही है।

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यह कोई आम चैटबॉट नहीं है, बल्कि वर्चुअल डिजिटल इंसान हैं जो कंप्यूटर पर बिल्कुल वैसे ही काम कर सकते हैं जैसे असली कर्मचारी। ये की-बोर्ड और माउस का इस्तेमाल कर सकते हैं, फाइलें खोल सकते हैं, ईमेल लिख सकते हैं, और किसी भी सॉफ्टवेयर पर इंसानों जैसी दक्षता दिखा सकते हैं।

घोरी के मुताबिक, ये AI इतने असली लगते हैं कि कई बार xAI के असली कर्मचारी भी भ्रमित हो जाते हैं। कई मामलों में मैनेजर समझ ही नहीं पाए कि जिसे काम सौंपा गया था, वह इंसान नहीं बल्कि AI था। पॉडकास्ट के बाद घोरी ने xAI छोड़ने का ऐलान किया।

AI कर्मचारियों की विशेषताएँ:

  • ये कंप्यूटर स्क्रीन देख सकते हैं और की-बोर्ड व माउस का उपयोग कर सकते हैं।

  • किसी भी सॉफ़्टवेयर के लिए अलग से सेटिंग की जरूरत नहीं।

  • ईमेल लिखना, रिपोर्ट बनाना, डेटा संभालना और सामान्य ऑफिस कार्य कर सकते हैं।

  • कंपनी के इंटर्नल ड्यूटी चार्ट में AI को भी स्टाफ की तरह जोड़ा गया।

माइक्रोसॉफ्ट को चुनौती
xAI का यह प्रोजेक्ट सीधे Microsoft Office (Word, Excel, Outlook) के विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है। मजाक में मस्क ने इसे Macrohard नाम दिया। उनका लक्ष्य है कि आने वाले समय में AI सिर्फ असिस्टेंट नहीं, बल्कि मुख्य कर्मचारी बन जाए।

कंप्यूटिंग पावर के लिए टेस्ला कारों का इस्तेमाल
इतने बड़े AI सिस्टम के संचालन के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। घोरी के अनुसार, xAI यह विचार कर रही है कि टेस्ला कारों में लगे पावरफुल कंप्यूटर चिप्स का उपयोग AI ऑपरेशन में किया जाए। अमेरिका और अन्य देशों में लाखों टेस्ला कारें ज्यादातर समय खड़ी रहती हैं। योजना यह है कि जब ये कारें उपयोग में न हों, तब उनके कंप्यूटर चिप्स AI सिस्टम के लिए काम करें। इसके बदले कार मालिकों को पेमेंट भी किया जाएगा। यह एक तरह का शेयर किए गए कंप्यूटर नेटवर्क जैसा सिस्टम होगा।

यह कदम साबित करता है कि भविष्य के ऑफिस में इंसान और AI की सीमाएँ धीरे-धीरे मिटती जा रही हैं। आने वाले वर्षों में हो सकता है कि आप अपने ऑफिस में बैठे सहकर्मी को देख कर भी पहचान न पाएं कि वह इंसान है या AI।

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