Friday, February 6

सरदार सरोवर बांध: पीएम मोदी ने 17 दिन में लगवाए गेट, 56 साल बाद पूरी हुई परियोजना

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना 1961 में पंडित नेहरू के शासनकाल में शुरू हुई थी, लेकिन दशकों तक अधूरी रही। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पुराने प्लानिंग मॉडल में जीने वाली कांग्रेस प्रोजेक्ट को लटकाने और अटकाने में माहिर थी।

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सरदार पटेल की योजना 1946 से रुकी
मोदी ने बताया कि 1946 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने नर्मदा नदी के जल का दोहन करने की योजना बनाई थी। हालांकि, उनके निधन के बाद यह परियोजना कांग्रेस सरकारों के शासन में लगभग पांच दशकों तक लालफीताशाही और देरी का शिकार रही।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 51 घंटे का उपवास
अप्रैल 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीए सरकार द्वारा बांध की ऊंचाई बढ़ाने से इनकार के विरोध में 51 घंटे का उपवास रखा और लाखों किसानों के जीवनयापन के लिए संघर्ष किया।

प्रधानमंत्री बनने के 17 दिन में अंतिम मंजूरी
मोदी ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के सिर्फ 17 दिनों के भीतर उन्होंने बांध के गेट लगाने की अंतिम मंजूरी दी, जिससे दशकों से रुकी योजना को गति मिली।

बांध का महत्व
17 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री मोदी ने 138.68 मीटर ऊंचाई वाले सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया। यह बांध लाखों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करता है और नर्मदा नदी का जल कच्छ के रेगिस्तानी क्षेत्रों तक पहुँचता है, जिससे हजारों किसानों और ग्रामीणों के जीवन में बदलाव आया।

कांग्रेस की नीति पर निशाना
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस की नीति ‘लटकाना, अटकाना और भटकाना’ रही। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इसी कार्यशैली के कारण सरदार सरोवर बांध, कश्मीर रेलवे प्रोजेक्ट और बोगीबील पुल जैसी परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रहीं।

लागत और देरी
उन्होंने बताया कि यह योजना 900 करोड़ में पूरी होनी थी, लेकिन कांग्रेस की देरी के कारण इसकी लागत बढ़कर 90 हजार करोड़ तक पहुँच गई।

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