
नई दिल्ली: चीन के अंदर इस समय राजनीतिक और सैन्य स्तर पर उथल-पुथल का माहौल है। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपनी सेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों जनरल झांग यूशिया और जनरल ल्यू झेनली के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना पड़ा। इनमें से जनरल झांग, जिनपिंग के बचपन के दोस्त और लंबे समय तक करीबी सहयोगी रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों पर चेयरमैन रेस्पॉन्सिबिलिटी सिस्टम का उल्लंघन करने का आरोप है। इसका मतलब है कि उन्होंने राष्ट्रपति के अधिकारों को चुनौती दी और पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की युद्ध क्षमता को प्रभावित किया। यह कार्रवाई शी जिनपिंग के सेना पर एकतरफा नियंत्रण की रणनीति को स्पष्ट करती है, खासकर अगले साल होने वाली 21वीं पार्टी कांग्रेस से पहले।
PLA में उथल-पुथल और नेतृत्व परिवर्तन
शी जिनपिंग की इस कार्रवाई से PLA के शीर्ष अधिकारियों के बीच लंबे समय तक हलचल रहेगी। खाली हुए पदों को भरोसेमंद अधिकारियों से भरने में समय लगेगा। हालांकि, युद्ध क्षमता पर असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि PLA में हजारों मेजर जनरल स्तर के अधिकारी अभी भी मौजूद हैं।
ताइवान और LAC पर असर
इस कदम से ताइवान को थोड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि शी जिनपिंग फिलहाल PLA की पूरी क्षमता पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हाल की सावधानी और बातचीत के बावजूद करीब 50,000 सैनिक तैनात हैं। PLA की आंतरिक उथल-पुथल भारत के लिए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने और LAC नीति को और मजबूत करने का अवसर प्रदान कर सकती है।
भारत के लिए रणनीतिक संदेश
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन समय और अस्पष्टता का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए करता है, जबकि भारत अक्सर इसे बाध्यकारी मानने की कोशिश करता है। ऐसे में नई दिल्ली के लिए संयम बरतना स्थिरता बनाए रखने और अपनी तैयारियों को मजबूत करने का अवसर है। PLA के भीतर हो रही हलचल भारत को रणनीतिक रूप से क्षमता बढ़ाने और अपने मजबूत स्थिति बनाने का मौका देती है।