
वडोदरा। निजी जीवन में तूफान हो और मैदान पर फाइनल जैसा दबाव—ऐसे हालात किसी भी खिलाड़ी को तोड़ सकते हैं। लेकिन स्मृति मंधाना ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक बेहतरीन बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से बेहद मजबूत कप्तान भी हैं। पलाश मुच्छल के साथ शादी टूटने की खबरों के बाद जब हर तरफ चर्चाएं थीं, तब मंधाना ने अपने दर्द को ताकत में बदला और WPL 2026 फाइनल में ऐसी पारी खेली, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
महिला प्रीमियर लीग 2026 के फाइनल मुकाबले में स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने दिल्ली कैपिटल्स को 6 विकेट से हराकर दूसरी बार खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत की सबसे बड़ी कहानी बनीं—स्मृति मंधाना।
फाइनल में दिखा कप्तान का ‘रौद्र अवतार’
दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 203 रन बनाए और आरसीबी के सामने 204 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य खड़ा कर दिया। ऐसे में टीम को तेज शुरुआत और मजबूत नेतृत्व की जरूरत थी। स्मृति मंधाना ने वही किया, जो बड़े खिलाड़ी बड़े मुकाबलों में करते हैं।
उन्होंने महज 41 गेंदों पर 87 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें 12 चौके और 3 छक्के शामिल थे। मंधाना की इस ‘कैप्टन नॉक’ ने दिल्ली के गेंदबाजों की रणनीति ध्वस्त कर दी और मैच को आरसीबी की पकड़ में ला दिया।
यह सिर्फ रन बनाने की पारी नहीं थी, बल्कि यह एक संदेश था—मुश्किलें चाहे जितनी हों, मैदान पर स्मृति मंधाना कभी हार नहीं मानतीं।
60 दिन पहले टूटी शादी, लेकिन हौसला नहीं टूटा
फाइनल से करीब दो महीने पहले स्मृति मंधाना की निजी जिंदगी में बड़ा उतार-चढ़ाव आया था। खबरों के मुताबिक, उन्होंने 7 दिसंबर को घोषणा की थी कि पलाश मुच्छल के साथ उनकी शादी कैंसल हो गई है। दोनों की शादी 23 नवंबर को होनी थी, लेकिन वह भी टल गई थी।
इस घटनाक्रम ने उनके प्रशंसकों को चौंका दिया, लेकिन स्मृति ने इस टूटन को अपने खेल पर असर नहीं डालने दिया। बल्कि, उन्होंने इसे अपने आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की ताकत बना लिया।
आखिरी ओवर में रोमांच और फिर जीत
मैच अंतिम ओवरों में बेहद रोमांचक हो गया था। स्मृति के आउट होने के बाद मुकाबला फंसता नजर आया और स्टेडियम में तनाव बढ़ गया। आखिरी ओवर में राधा यादव के चौकों और विकेटकीपर लिजेल ली के हाथ से स्टंप गिरने वाले ड्रामे ने दर्शकों की धड़कनें बढ़ा दीं।
लेकिन अंत में आरसीबी ने संयम और अनुभव के दम पर मुकाबला जीत लिया और 6 विकेट से दिल्ली को हराकर WPL 2026 की चैंपियन बन गई।
यह जीत सिर्फ ट्रॉफी नहीं, संघर्ष पर विजय की कहानी
स्मृति मंधाना की यह जीत सिर्फ एक टूर्नामेंट जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस महिला की कहानी है जो टूटकर भी बिखरी नहीं। जिसने निजी दुख को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे मैदान पर आग बनाकर उतार दिया।
WPL 2026 का फाइनल स्मृति मंधाना की उस पारी के लिए याद रखा जाएगा, जिसने साबित कर दिया—कप्तान वही होता है, जो हालातों को नहीं, हालात कप्तान को याद रखते हैं।