
घर बनाना हर किसी का सपना होता है, लेकिन इस दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि कौन सी ईंट इस्तेमाल करें। पारंपरिक लाल मिट्टी वाली ईंटें लंबे समय से चलन में हैं, लेकिन आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग के अनुसार फ्लाई ऐश ईंटें अब मजबूत, टिकाऊ और किफायती विकल्प बनकर उभर रही हैं।
फ्लाई ऐश ईंट और लाल ईंट में फर्क
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मजबूती और स्ट्रेंथ: फ्लाई ऐश ईंटें मशीन से बनाई जाती हैं, इसलिए उनका भार सहने का क्षमता अधिक और एकसमान होती है। लाल ईंटें भट्ठी में पकने के दौरान हमेशा मजबूत नहीं बन पातीं।
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टिकाऊपन और नमी: लाल ईंटें नमी सोख लेती हैं, जिससे दीवारों में सीलन की समस्या आती है। फ्लाई ऐश ईंटें सघन और समय के साथ और मजबूत होती जाती हैं।
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पानी सोखने की क्षमता: फ्लाई ऐश ईंटें पानी बहुत कम सोखती हैं, जिससे प्लास्टर मजबूत रहता है और दीवारें लंबे समय तक टिकती हैं।
लागत और बचत
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फ्लाई ऐश ईंटें लगभग लाल ईंटों के बराबर कीमत में आती हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से सीमेंट और प्लास्टर की बचत होती है।
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निर्माण के दौरान बर्बादी केवल 5% तक रहती है, जबकि लाल ईंटों में यह 10% तक हो सकती है।
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फ्लाई ऐश ईंटें सांचे में बनी होती हैं, इसलिए आकार सटीक और सतह स्मूथ होती है, जिससे प्लास्टर कम लगता है।
पर्यावरण पर असर
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लाल ईंटों के लिए उपजाऊ मिट्टी का इस्तेमाल होता है और भट्टियों से धुआं निकलता है।
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फ्लाई ऐश ईंटें थर्मल पावर प्लांट की राख से बनती हैं, जिससे मिट्टी की बचत होती है और वायु प्रदूषण न्यूनतम रहता है।
इंजीनियर का सुझाव
सिविल इंजीनियर मुकेश भुसारे के अनुसार, फ्लाई ऐश ईंटें घर की मजबूती, टिकाऊपन और लागत बचत के लिहाज से सबसे बेहतरीन विकल्प हैं।