Wednesday, February 4

आईआईटी कानपुर में दो साल में नौ छात्र आत्महत्या, जांच रिपोर्ट न सार्वजनिक करने पर प्रशासन कटघरे में

कानपुर। आईआईटी कानपुर में बीते दो वर्षों में लगातार छात्र आत्महत्या की घटनाओं ने छात्रों और उनके परिजनों को दहशत में डाल दिया है। इस दौरान कुल नौ छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं। हाल ही में शोधार्थी रामस्वरूप ईशराम ने 20 जनवरी को कैंपस की छठवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली।

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केंद्र सरकार ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पहली बार जांच कमेटी गठित की है। आईआईटी प्रशासन भी इस समस्या के समाधान के लिए तथ्य जुटा रहा है, लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। वे दोषियों के नाम सार्वजनिक करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि पारदर्शिता की कमी के कारण कैंपस में अफवाहें और गलत जानकारी फैल रही हैं। इसके लिए प्रशासन को सभी आत्महत्याओं की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। छात्रों का आरोप है कि संस्थान की डाक्टोरल मॉनिटरिंग कमेटी (डीएमसी) शोध में मदद करने के बजाय मानसिक दबाव बनाने का माध्यम बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि डीएमसी में शामिल प्रोफेसरों के चयन में छात्रों की सहमति जरूरी हो।

छात्रों की मुख्य मांगें:

  • डीएमसी की गाइडलाइन के अनुचित फैसलों को पलटने का अधिकार।

  • थिसिस में दिए गए ग्रेड का स्पष्ट और लिखित कारण उपलब्ध कराना।

  • सोशल मीडिया और कैंपस में काउंसलिंग व्यवस्था को केवल नाम बदलकर सामान्य नहीं किया जा सकता; वास्तविक सुधार की आवश्यकता।

छात्र और छात्राओं ने सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। उनका कहना है कि प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए तत्काल कदम उठाना आवश्यक है।

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