
नई दिल्ली: आपने पेन ड्राइव में दो चौकोर छेद जरूर देखे होंगे। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ डिज़ाइन का हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये छेद तकनीक के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेन ड्राइव पर बने ये दो छेद कई कारणों से जरूरी हैं:
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सही दिशा पहचानने में मदद:
कई बार पेन ड्राइव को पोर्ट में लगाते समय समझ नहीं आता कि इसे किस तरफ से फिट करना है। ये छेद संकेत देते हैं कि ड्राइव का कौन सा हिस्सा ऊपर रहेगा। इससे पोर्ट में ड्राइव उल्टा लगाने का खतरा कम हो जाता है। -
मजबूत पकड़ के लिए:
जब पेन ड्राइव पोर्ट में लगती है, तो मेटल के उभार इन छेदों में फिट होकर ड्राइव को स्थिर रखते हैं। इससे कनेक्टर्स सही ढंग से मिलते हैं और डेटा ट्रांसफर में कोई दिक्कत नहीं आती। -
डेटा ट्रांसफर में सहायक:
ये छेद पेन ड्राइव को पोर्ट में स्थिर रखते हैं और कनेक्टर्स को सही तरीके से अटैच करते हैं। यदि कनेक्शन ढीला हो, तो डेटा ट्रांसफर प्रभावित हो सकता है। -
स्टैंडर्ड डिजाइन के अनुसार:
USB का डिजाइन ‘USB-IF’ नामक ग्लोबल संस्था द्वारा तय किया जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर की कंपनियों की पेन ड्राइव्स में ये छेद मौजूद होते हैं और किसी भी कंप्यूटर में आसानी से फिट हो जाती हैं। -
मजबूती और सुरक्षा के लिए:
ये छेद पेन ड्राइव के अंदर मौजूद प्लास्टिक हिस्से को मेटल के खोल के साथ मजबूती से जोड़ते हैं। साथ ही, गर्म होने वाली चिप पर दबाव कम करने में भी मदद करते हैं।
इसलिए अगली बार जब आप पेन ड्राइव इस्तेमाल करें, तो समझें कि ये दो छोटे छेद सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि आपकी सुविधा और डेटा की सुरक्षा के लिए हैं।