Wednesday, February 4

पद्मश्री ह्यूग गैंटजर का निधन: मसूरी ने खो दी अपनी आवाज, साहित्य और पर्यावरण जगत में अपूरणीय क्षति

मसूरी: पद्मश्री से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ट्रैवल राइटर और पर्यावरण संरक्षक ह्यूग गैंटजर का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मसूरी के किंक्रेग लाइब्रेरी रोड स्थित अपने आवास ओक ब्रुक में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल मसूरी, बल्कि साहित्य, ट्रैवल जर्नलिज्म और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े देश-विदेश के लोग शोकाकुल हैं।

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ह्यूग गैंटजर ने भारतीय नौसेना में कमांडर के रूप में सेवाएं देने के बाद अपनी पत्नी कोलीन गैंटजर के साथ भारत के अनदेखे कोनों को शब्दों में जीवंत करने का काम किया। उनके लेखन में भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक विरासत का अनमोल दस्तावेज़ संजोया गया। उन्होंने 30 से अधिक किताबें लिखीं, हजारों लेख प्रकाशित किए और 52 डॉक्यूमेंट्रीज़ दूरदर्शन पर प्रसारित कराई।

वे मसूरी के पर्यावरण रक्षक के रूप में भी विख्यात थे। चूना खनन और अंधाधुंध निर्माण के खिलाफ उन्होंने खुलकर आवाज उठाई, जिससे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मसूरी में खनन पर रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य के रूप में उन्होंने पहाड़ों के संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान दिया।

ह्यूग गैंटजर की जीवन संगिनी कोलीन गैंटजर का निधन 6 नवंबर 2024 को हो गया था। दोनों को ट्रैवल जर्नलिज्म में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

उनका अंतिम संस्कार 4 फरवरी को कैमल्स बैक कब्रिस्तान में पारिवारिक प्लॉट पर संपन्न होगा। उनके निधन पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों और आम नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

मसूरी ने न केवल एक लेखक खोया, बल्कि उस आवाज़ को खो दिया जिसने दशकों तक इस पहाड़ी शहर की सुंदरता, संवेदना और संघर्ष को दुनिया के सामने रखा।

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