
नई दिल्ली: भारत के बहुप्रतीक्षित पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के विकास और निर्माण की दौड़ में सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बाहर हो गई है। इस दौड़ में तीन प्राइवेट सेक्टर कंपनियों—टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो और भारत फोर्ज—को शॉर्टलिस्ट किया गया है। अगले तीन महीनों में इन तीनों में से फाइनल विजेता का ऐलान किया जाएगा।
AMCA की तकनीकी खूबियाँ
AMCA में अत्याधुनिक मिलिट्री तकनीकें शामिल होंगी। इसमें स्टेल्थ फीचर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इंटीग्रेशन, लंबी दूरी तक टारगेट करने की क्षमता और अनमैंड सिस्टम्स के साथ मिलकर काम करने की क्षमता शामिल है। विमान की अन्य प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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रडार को चकमा देने वाली एडवांस स्टेल्थ तकनीक
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2.15 मैक की रफ्तार और 27,000 किलोग्राम तक वजन उठाने की क्षमता
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AESA रडार और सुपर क्रूज मिसाइल से लैस
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इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में बेहतर दक्षता और सरफेस स्ट्राइक क्षमता
HAL क्यों बाहर हुआ?
HAL पहले तेजस जेट के निर्माण में देरी और अमेरिकी इंजन सप्लाई में बाधाओं की वजह से आलोचनाओं के घेरे में रहा है। HAL को 97 तेजस Mark-1A विमानों का ठेका मिला था, लेकिन वायु सेना को अभी तक पहली यूनिट भी नहीं मिली है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, HAL ने वेपन इंटीग्रेशन और फायरिंग ट्रायल में देरी के कारण समय पर डिलीवरी देने में चुनौती पाई।
बोली प्रक्रिया और विजेता का चयन
प्रोजेक्ट के लिए सात कंपनियों ने बोली लगाई थी, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञता, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, ऑर्डर बुक और वित्तीय मजबूती के आधार पर तीन कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। फाइनल विजेता एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के साथ मिलकर AMCA के पांच प्रोटोटाइप तैयार करेगा। प्रोटोटाइप के लिए 15,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
डिलीवरी और भविष्य
AMCA भारत का अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोग्राम माना जा रहा है। पहले बैच में लगभग 120 फाइटर जेट्स के ऑर्डर की संभावना है, जिनकी डिलीवरी 2035 तक शुरू होने की उम्मीद है। भविष्य में अधिक एडवांस्ड वेरिएंट्स भी विकसित किए जाएंगे, जिससे भारतीय वायु सेना का हवाई प्लेटफॉर्म और मजबूत होगा।