
जयपुर: मार्च-अप्रैल में होने वाले पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दक्षिण राजस्थान के आदिवासी उप-योजना (TSP) क्षेत्रों में राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ गई है। उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में OBC और MBC संगठनों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है। कलेक्ट्रेट और गांवों की दीवारों पर ‘वोट नहीं’ के पोस्टर सरकार और प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी बन गए हैं।
विवाद की जड़:
TSP क्षेत्रों में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के तहत अनुसूचित जनजाति (ST) को 45% और अनुसूचित जाति (SC) को 5% कोटा मिलता है, जबकि शेष 50% सामान्य वर्ग के लिए है। OBC अधिकार मंच के समन्वयक नत्थूलाल पाटीदार ने बताया कि इन जिलों में OBC आबादी 22% से 28% के बीच होने के बावजूद नौकरियों और शिक्षा में उनका प्रतिनिधित्व 10% से भी कम है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा लोकसभा चुनाव में दिए गए आश्वासन केवल वोट तक सीमित रहे।
राजनीतिक रूप से ‘अछूत’ होने का दर्द:
अखिल भारतीय लबाना समाज की उपाध्यक्ष पूनम लबाना ने बताया कि डूंगरपुर के माडा जैसे गांवों में, जहां लबाना समुदाय (MBC) बहुसंख्यक है, लोग सत्ता से बाहर हैं। ST के लिए आरक्षित प्रमुख पदों और सामान्य वर्ग की आर्थिक प्रतिस्पर्धा ने उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर बना दिया है।
BAP, BJP और कांग्रेस को चुनौती:
रेबारी समाज के अध्यक्ष महेंद्र देसाई ने कहा कि यह बहिष्कार किसी एक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक ठोस आश्वासन नहीं मिलता, किसी भी राजनीतिक उम्मीदवार को गांवों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। OBC और MBC समूहों की मांग है कि ST/SC कोटे को छेड़े बिना, सामान्य वर्ग में OBC को 10.5% और MBC को 2.5% आरक्षण मिले।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण राजस्थान में बढ़ता यह असंतोष आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है।