
गाजियाबाद। दिल्ली से फर्जी पते पर जारी 22 पासपोर्ट का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस ने पासपोर्ट धारकों की लोकेशन और विदेश यात्राओं का ब्योरा जुटाने के लिए विदेश मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) से जानकारी मांगी है। मामले की जांच के लिए पुलिस की पांच टीमें गठित की गई हैं। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी भोजपुर थाने पहुंचकर जांच में जुटे रहे। इस मामले में भोजपुर थाने में तैनात मुंशी दीपक चौधरी को निलंबित कर दिया गया है।
रीजनल पासपोर्ट अफसर, दिल्ली ने 11 दिसंबर 2025 को गाजियाबाद पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर बताया था कि दिल्ली पासपोर्ट कार्यालय से जारी 22 पासपोर्ट में भोजपुर और त्योड़ी गांव के पते दर्ज हैं और सभी में एक ही मोबाइल नंबर अंकित है। पुलिस ने जब इन पतों का सत्यापन किया तो वे फर्जी पाए गए।
सत्यापन सबसे बड़ी चुनौती
जांच अधिकारियों के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती उन 22 व्यक्तियों की पहचान और सत्यापन करना है, जिनके नाम पर पासपोर्ट जारी हुए। आवेदन के दौरान फर्जी आधार और पैन कार्ड लगाए गए थे। पासपोर्ट में दर्ज नाम वास्तविक हैं या बदले गए, यह भी जांच का विषय है। एसीपी अमित सक्सेना ने बताया कि संदिग्धों के यात्रा रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
दिल्ली से संचालित था गिरोह
पुलिस जांच में सामने आया है कि फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला गिरोह दिल्ली से संचालित हो रहा था। पूछताछ में कुतुब विहार निवासी विवेक गांधी का नाम सामने आया, जो डाकघर और पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में संपर्क स्थापित करता था। विवेक गांधी और प्रकाश सुब्बा कथित तौर पर पासपोर्ट बनवाने के इच्छुक लोगों की तलाश करते थे। दिल्ली से सूचना मिलने के बाद दिसंबर से ही जांच शुरू कर दी गई थी।
साइबर सेल की पड़ताल
साइबर सेल अब तक 20 से अधिक मोबाइल नंबरों की जांच कर चुकी है। चार अलग-अलग नंबरों से 22 पासपोर्ट के लिए आवेदन किए गए थे। इनमें एक नंबर से 13, दूसरे से छह, तीसरे से दो और चौथे से एक आवेदन किया गया।
रविवार को पुलिस ने एक महिला समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि महिला और उसका बेटा मूल रूप से अफगानिस्तान के निवासी हैं और वर्ष 1990 से दिल्ली में रह रहे हैं।
गांवों के चयन पर भी जांच
भोजपुर और त्योड़ी गांव के पतों का चयन क्यों किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के लिए इन इलाकों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया।