
वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी का निर्धारण किया गया है। इसके तहत बिहार को 1,51,831 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो पिछले वर्ष 1,38,515 करोड़ रुपये की तुलना में 13,316 करोड़ रुपये अधिक हैं।
वहीं, झारखंड को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में 51,236 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। इसमें कॉरपोरेशन टैक्स में 15,040 करोड़, इनकम टैक्स में 18,233 करोड़, केंद्रीय जीएसटी में 14,013 करोड़, कस्टम ड्यूटी में 2,733 करोड़, केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 1,164 करोड़ और अन्य करों में करीब 51 करोड़ रुपये शामिल हैं।
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बजट में अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और जनता के हित में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
अर्थशास्त्री डॉ. सुधांशु कुमार ने बताया कि वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी मिलती है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय करों की वसूली में लगातार वृद्धि के कारण राज्यों को मिलने वाली राशि साल-दर-साल बढ़ रही है।
पिछले पांच वर्षों में बिहार की हिस्सेदारी इस प्रकार रही:
2021-22: 86,942 करोड़
2022-23: 97,767.28 करोड़
2023-24: 1,14,289 करोड़
2024-25: 1,28,151.10 करोड़
2025-26: 1,38,515 करोड़
बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बजट पूर्व बैठक में उपकर (सेस) और अधिभार (सरचार्ज) में राज्यों की हिस्सेदारी की मांग की थी। उन्होंने कहा कि उपकर और अधिभार की हिस्सेदारी बढ़कर 13.6 प्रतिशत हो गई है, लेकिन इन्हें अभी भी विभाज्य कोष में शामिल नहीं किया गया। इसके कारण बिहार जैसे राज्यों को संवैधानिक हिस्से का नुकसान हो रहा है।
इस बजट के अनुसार बिहार और झारखंड की हिस्सेदारी में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे झारखंड में नाराजगी का माहौल है।