Monday, February 2

बेल्जियम से डिपोर्ट की गई केरल की नर्स के खिलाफ पासपोर्ट जालसाजी का मामला खारिज, कोर्ट ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली: करीब एक दशक पुराने मामले में केरल की नर्स लीना मारिया सूसाई को अदालत ने धोखाधड़ी और पासपोर्ट जालसाजी के आरोपों से बरी कर दिया। यह मामला 2015 में बेल्जियम से उसके डिपोर्ट होने से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रहा और मामले में कई जांच खामियां पाई गईं।

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कोर्ट ने सुनाया फैसला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रणव जोशी ने कहा कि पूरे मामले में आरोपी नर्स के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए कोई ठोस आधार नहीं है। इसलिए उन्हें धोखाधड़ी, जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत लगाए गए सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। अदालत ने नोट किया कि जांच में कस्टडी की उचित श्रृंखला का अभाव, मूल दस्तावेजों की अनुपस्थिति और अभियोजन पक्ष की ओर से जानकारी छिपाने जैसी कमियां थीं।

क्या था पूरा मामला
दिसंबर 2015 में लीना मारिया सूसाई नई दिल्ली से ब्रुसेल्स गई थीं। अगले दिन बेल्जियम के अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट में कथित छेड़छाड़ पाए जाने के बाद उन्हें डिपोर्ट कर दिया। उस समय उनका मूल पासपोर्ट रख लिया गया, FIR नहीं हुई और उन्हें केरल लौटने की अनुमति दी गई।

FRRO (फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस) की ओर से केवल आठ महीने बाद, 2016 में, इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। लीना को उसी साल अग्रिम जमानत मिल गई और चार्जशीट 12 जुलाई 2022 को दायर की गई। अदालत ने कहा कि भारतीय अधिकारियों ने नई दिल्ली से उनके प्रस्थान के समय कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं पाई और मामला उनके डिपोर्ट होने के बाद शुरू हुआ।

अदालत की टिप्पणियां
कोर्ट ने कहा कि वियना कन्वेंशन के तहत बेल्जियम के अधिकारियों से प्रत्यक्ष पूछताछ नहीं हो सकी। साथ ही, कोई रिकॉर्ड नहीं था कि बेल्जियम ने पासपोर्ट कब भेजा या FRRO को कब मिला। जांच में कई दस्तावेज़ गायब थे और स्पेशल रिपोर्ट का जिक्र केवल FRRO की चिट्ठी में था। इन कारणों से अदालत ने सूसाई को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

 

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