Friday, January 30

ओबीसी आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट में एमपी सरकार की बड़ी लापरवाही, सरकारी वकील नहीं हुए उपस्थित

भोपाल। मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण से जुड़े संवेदनशील मामलों में गुरुवार को राज्य सरकार की बड़ी लापरवाही सामने आई। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति नरसिंहा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष जब सीरियल नंबर 106 पर अंतिम बहस शुरू होने लगी, तो मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई भी अधिवक्ता उपस्थित नहीं था।

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शीर्ष अदालत ने इस गैर-जिम्मेदाराना आचरण पर नाराजगी जताई और सरकार के रवैये पर खेद व्यक्त किया।

ओबीसी वर्ग के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी ने कहा कि सरकार ने इस केस के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत पांच अन्य वरिष्ठ वकीलों को नियुक्त किया था। इसके बावजूद सुनवाई के समय किसी वकील का अनुपस्थित होना इस बात को दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है।

एमपी महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग मोर्चा की उपाध्यक्ष विभा पटेल ने आरोप लगाया कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि ओबीसी समाज के अधिकारों के प्रति भाजपा सरकार की जानबूझकर की गई उपेक्षा है।

ओबीसी वर्ग के वकीलों अनूप जॉर्ज चौधरी, रामेश्वर सिंह ठाकुर और अन्य के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को तय की। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने खुद इन मामलों को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करवाया था।

ओबीसी समर्थकों का आरोप है कि 13% पदों को होल्ड पर रखकर नियुक्तियां अटकाई जा रही हैं, जबकि न तो हाईकोर्ट ने रोक लगाई है और न ही सुप्रीम कोर्ट। सरकार लगातार “तारीख पर तारीख” दे रही है, जिससे ओबीसी वर्ग को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

 

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