
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को भारत मंडपम में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘शक्ति संवाद: क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका पर जोर दिया।
कार्यक्रम में एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन विजया रहाटकर, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव बी. राधिका चक्रवर्ती सहित आयोग की अन्य सदस्य भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के उद्देश्य—लीगल अवेयरनेस, ग्रीवेंस रिड्रेसल, पॉलिसी कंसल्टेशन और क्षमता निर्माण—की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास देश की करोड़ों बेटियों में साहस और आत्मविश्वास जगाने का माध्यम बनेंगे।
महिला सुरक्षा और सुविधा के ठोस कदम
सीएम रेखा गुप्ता ने महिलाओं के लिए दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते सुरक्षा मानकों का पालन हो। इसके अलावा कामकाजी माताओं और श्रमिक बहनों के बच्चों के लिए राजधानी में 500 ‘पालना केंद्र’ स्थापित किए गए हैं, जिससे महिलाएं निश्चिंत होकर काम कर सकें।
आर्थिक सशक्तिकरण और न्याय प्रणाली में सुधार
आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को 10 करोड़ रुपये तक का बिना गारंटी वाला लोन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए 10,000 अत्याधुनिक कैमरे और 1 लाख स्मार्ट सेंसर्ड एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं। न्याय की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 53 नए न्यायिक पदों को स्वीकृति देकर फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
सीएम ने कहा, “‘शक्ति संवाद’ केवल एक थीम नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामूहिक शक्ति और आपसी संवाद से भविष्य का मार्ग तय करने का माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप भारत आज महिला सशक्तिकरण से आगे बढ़कर ‘वुमन-लेड गवर्नेंस’ और ‘वुमन-लेड डिसीजन मेकिंग’ के दौर में प्रवेश कर चुका है।”
सशक्त महिलाओं के उदाहरण
गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका, सशस्त्र बलों में साहसिक प्रदर्शन, आदिवासी परिवार से राष्ट्रपति तक महिला की यात्रा और संसद में महिला नेतृत्व—ये सभी उदाहरण दर्शाते हैं कि भारत में महिलाओं की निर्णायक भूमिका लगातार बढ़ रही है।
सीएम ने ‘बेटी बचाओ’ और ‘बेटी पढ़ाओ’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि अब देश उस स्तर पर है जहां बेटियों के सपनों और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए अवसरों का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने महिला आयोग को देश की आधी आबादी को संबल देने, सुरक्षित और गरिमामय जीवन के अवसर सुनिश्चित करने और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को और सशक्त बनाने का केंद्र बताया।
अंत में मुख्यमंत्री ने उत्तर-पूर्वी राज्यों से आई महिला आयोग अध्यक्षों के समर्पण और जज्बे की सराहना की और महिला आयोग के 34 वर्षों के प्रेरक सफर को नमन किया। उन्होंने सभी अध्यक्षों और सदस्यों से आह्वान किया कि वे इसी इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता के साथ देश की महिलाओं को सशक्त बनाएं।