Wednesday, May 20

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आवारा कुत्तों की नसबंदी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा— रोज 100 कुत्तों की नसबंदी भूसे के ढेर में सूई खोजने जैसी

 

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देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि रोज केवल 100 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा रही है, तो यह प्रयास “भूसे के ढेर में सूई खोजने जैसा” है और इससे समस्या का समाधान संभव नहीं है।

 

राज्यों के रवैये पर नाराजगी

 

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और पी. बी. पारदीवाला की पीठ ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु द्वारा अदालत के पूर्व निर्देशों के पालन पर गहरी नाराजगी जताई।

कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को दिए गए अपने आदेश में संशोधन की मांग वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

 

‘समस्या नहीं सुलझी तो हालात और बिगड़ेंगे’

 

सुनवाई के दौरान अदालत ने चेतावनी दी कि यदि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो उनकी संख्या हर साल 10 से 15 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो जाएगी।

 

संसाधनों की भारी कमी पर सवाल

 

राजस्थान सरकार की ओर से पेश हलफनामे पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे राज्य में आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए मात्र 45 वाहन उपलब्ध हैं, जबकि केवल जयपुर शहर के लिए ही कम से कम 20 वाहनों की आवश्यकता है।

कोर्ट ने साफ कहा कि पर्याप्त बजट, वाहन और मानव संसाधन के बिना ‘पकड़ना, नसबंदी, टीकाकरण और छोड़ना (CSVR)’ प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करना असंभव है।

 

NHAI को ऐप बनाने और गौशालाओं पर विचार के निर्देश

 

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया कि वह एक ऐसा मोबाइल ऐप विकसित करने पर विचार करे, जिसके माध्यम से आम नागरिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की सूचना दे सकें।

इसके साथ ही अदालत ने हाईवे निर्माण से जुड़े ठेकेदारों से हर 50 किलोमीटर पर गौशालाएं बनाने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा।

 

AWBI को लंबित आवेदनों पर जल्द निर्णय के निर्देश

 

भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने अदालत को बताया कि नसबंदी केंद्रों से जुड़े 250 से अधिक आवेदन लंबित हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया कि वह इन आवेदनों पर शीघ्र निर्णय ले, ताकि नसबंदी अभियान को गति मिल सके।

 

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