Thursday, January 29

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, गिरिराज सिंह ने इसे ‘सनातन को बांटने वाला’ बताया

पटना: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी रेगुलेशन 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। अदालत ने निर्देश दिया है कि इस दौरान यूजीसी रेगुलेशन 2012 ही लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया और कहा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, सनातन को बांटने वाले यूजीसी के नियम पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार। मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता है।”

गिरिराज सिंह ने मीडिया से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित सभी को धन्यवाद देना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने देश में कभी भी भेदभाव नहीं किया और ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण भी उनके ही प्रयास से लागू हुआ।

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी छात्र के साथ जाति के आधार पर भेदभाव न हो, और इस विषय पर फिर से चर्चा आवश्यक है। वहीं, मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास लेकर आगे भी काम कर रहे हैं।

 

पटना में छात्रों का जोरदार विरोध प्रदर्शन

यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के खिलाफ पटना में छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन दिनकर गोलंबर पर हुआ, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा। ऑल बिहार स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) और सवर्ण एकता मंच के बैनर तले सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि नया यूजीसी बिल उच्च जाति के छात्रों के हितों के खिलाफ है। छात्र नेता विशाल कुमार ने कहा, अगर आप एकजुट रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे, अगर बंटेंगे तो बर्बाद हो जाएंगे।”
छात्र नेता सूर्यदेव कुमार ने इसे विभाजनकारी कानून करार दिया और कहा कि यह बिल छात्रों को दो समूहों में बांटने का प्रयास कर रहा है।

छात्र सरोज कुमार ने बिल की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और उचित जांच तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए। राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है और यह ऊपरी जातियों के खिलाफ है।

छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि बिल वापस नहीं लिया गया तो 1 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल की जाएगी।

 

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