
पटना: बिहार की वर्किंग वुमेन अब नौकरी छोड़कर खुद के बिजनेस की ओर बढ़ रही हैं। कोविड के बाद महिलाओं की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब वे जॉब से पैसे कमाने की बजाय अपना स्टार्टअप शुरू करने में दिलचस्पी ले रही हैं।
आंकड़े भी यही बताते हैं कि नीतीश सरकार की महिलाएं स्वरोजगार बनाने की मुहिम रंग ला रही है। आंध्र प्रदेश की क्रिया यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन के अनुसार, 2017-18 से 2023-24 के बीच बिहार में महिलाओं की लेबर फोर्स में भागीदारी (FLFPR) में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
महिला श्रम भागीदारी में सात गुना वृद्धि
बीते छह साल में बिहार में महिला श्रम भागीदारी दर 4.11% से बढ़कर 30.5% तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान गांवों की महिलाओं का रहा है। 2017 में गांव में कारोबारी महिलाओं की संख्या 35.2% थी, जो अब 2024 में 84.8% हो गई है। शहरों में भी महिला शक्ति चमक रही है, जहां यह आंकड़ा 25.4% से बढ़कर 61% हो गया है।
जॉब से कारोबार की ओर रुझान
जॉब में काम करने वाली महिलाओं की संख्या में गिरावट आई है। गांवों में जॉब करने वाली महिलाओं की संख्या 27.9% से घटकर 3.6% हो गई है, जबकि शहर में यह आंकड़ा 63.4% से घटकर 30.3% पर आ गया है। इसका मतलब है कि महिलाएं अब खुद अपने बिजनेस की मालिक बन रही हैं।
सरकार की योजनाएं कर रही सपोर्ट
बिहार सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना प्रमुख है।
- 10,000 रुपये से शुरू करें बिजनेस: योजना के तहत महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 10,000 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाती है, ताकि वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें।
- कितनी महिलाएं लाभान्वित हुईं: अब तक इस योजना से करीब 1.25 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं। शुरू में 75 लाख, बाद में 50 लाख और महिलाएं लाभान्वित हुईं।
- 2 लाख तक की अतिरिक्त मदद: जिन महिलाओं का स्वरोजगार सफल होता है, उन्हें 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त वित्तीय मदद दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव सकारात्मक संकेत है। अब महिलाएं केवल कामगार नहीं, बल्कि खुद की मेहनत और निर्णय क्षमता से समाज में बदलाव लाने वाली बन रही हैं।