
पश्चिम चंपारण, 28 जनवरी 2026: बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के मंगुराहा वनक्षेत्र से भटककर बाहर आए एक बाघ की मौत ने वन विभाग और स्थानीय किसानों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, बाघ मंगुराहा वनक्षेत्र से निकलकर पुरैनिया गांव के पास गेहूं के खेत में पहुंचा। माना जा रहा है कि किसानों ने फसल बचाने के लिए खेतों में बिजली के तार बिछा रखे थे। बाघ के इन तारों के संपर्क में आने से उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए मंगुराहा वनक्षेत्र कार्यालय ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि शव का अंतिम संस्कार वन विभाग के नियमानुसार किया जाएगा।
इस घटना ने कई सवाल उठाए हैं—बाघ जंगल से बाहर कब और कैसे आया, वन विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई, और क्या जंगल से सटे रिहायशी इलाकों और खेतों में उसके मूवमेंट को ट्रैक करने की व्यवस्था नहीं थी।
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धाराएँ:
ध्यान रहे कि बाघ का शिकार, चाहे जानबूझकर हो या अनजाने में, वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत गैरजमानती अपराध है। वन विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बिजली का करंट इंसानों के लिए भी बेहद खतरनाक है। मृत बाघ की मौत की आधिकारिक पुष्टि के बाद किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जंगल और आसपास के खेतों में सुरक्षा उपायों को और कड़ा किया जाएगा।