Wednesday, January 28

प्रलय के सबसे करीब पहुंची डूम्सडे क्लॉक, अब सिर्फ 85 सेकंड दूर इंसानियत के खत्म होने का समय

 

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वॉशिंगटन: वैश्विक तनाव और दुनिया भर में बढ़ते संघर्षों के बीच वैज्ञानिकों ने प्रलय की घड़ी को आधी रात के और भी करीब सेट कर दिया है। मंगलवार को बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट ने बताया कि अब यह घड़ी 85 सेकंड पहले से आधी रात पर टिक गई है, जो 80 साल के इतिहास में सबसे करीब है।

 

खतरे की वजहें

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि परमाणु युद्ध का खतरा, तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाइमेट चेंज और नुकसान पहुंचाने वाली तकनीक इंसानियत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

 

इंसानियत के पास कम हो रहा समय

बुलेटिन की अध्यक्ष एलेक्जेंड्रा बेल ने कहा, “घड़ी का संदेश साफ है: तबाही का खतरा बढ़ रहा है, सहयोग कम हो रहा है और हमारे पास समय तेजी से घट रहा है।” उन्होंने दुनिया की बड़ी ताकतों की आक्रामक नीति और ग्लोबल समझौतों में लगातार विफलता को भी खतरे का कारण बताया।

 

सतर्कता की जरूरत

साइंस एंड सिक्योरिटी बोर्ड के चेयरमैन डेनियल होल्ज ने चेतावनी दी कि एक बंटी हुई दुनिया इंसानियत को और कमजोर बना सकती है। उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक नेता तत्काल कदम नहीं उठाते हैं, तो तबाही की संभावना और बढ़ जाएगी।

 

प्रलय की घड़ी क्या है?

प्रलय की घड़ी एक प्रतीकात्मक घड़ी है जो दर्शाती है कि मानवता इंसानों द्वारा निर्मित खतरों के कारण खुद को समाप्त करने के कितने करीब है। आधी रात पर पहुंचने का मतलब है कि पृथ्वी रहने लायक नहीं रहेगी। पिछले साल यह घड़ी आधी रात से 89 सेकंड दूर थी, जिसे इस बार चार सेकंड और आगे बढ़ा दिया गया। 1991 में शीत युद्ध के खत्म होने पर यह घड़ी अपने इतिहास में सबसे दूर सेट की गई थी।

 

हर सेकंड कीमती है, इंसानियत को सतर्क रहना होगा।

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