
पटना: बिहार सहित देशभर में बैंक कर्मचारियों की एक दिन की हड़ताल ने बैंकिंग सिस्टम को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर सरकारी, ग्रामीण और सहकारी बैंक बंद रहे, जिससे अकेले बिहार में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन ठप हो गया।
चेक क्लियरेंस और नकद लेनदेन प्रभावित
हड़ताल के कारण सरकारी बैंकों में नकद जमा-निकासी, ड्राफ्ट निर्माण और चेक क्लियरेंस पूरी तरह बंद रही। व्यापारियों और आम जनता को भुगतान और लेनदेन में भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। कई इलाके के ATM खाली हो गए, और लोग निजी बैंकों के ATM की तलाश में भटकते नजर आए।
बैंक कर्मचारियों की मांग: फाइव डे वर्किंग
हड़ताल की मुख्य वजह ‘फाइव डे बैंकिंग’ यानी प्रत्येक शनिवार को अवकाश की मांग है। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सचिव डीएन त्रिवेदी ने बताया कि पहले IBA ने लिखित सहमति दी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक अधिसूचना जारी नहीं की। कर्मचारियों का तर्क है कि जब आरबीआई, LIC और वित्त मंत्रालय में शनिवार अवकाश है, तो उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
सड़कों पर प्रदर्शन और चेतावनी
राज्यभर में बैंक कर्मचारियों ने रैलियां निकालीं और प्रशासनिक कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया। नौ यूनियनों के संयुक्त मंच UFBU के नेतृत्व में करीब आठ लाख कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी जायज मांगों पर जल्दी अधिसूचना नहीं जारी करती, तो भविष्य में और कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
बिहार में इस हड़ताल ने न केवल बैंकिंग सेवाओं को प्रभावित किया, बल्कि व्यापार और आम जनता की रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों को भी बाधित कर दिया।